जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का प्रदर्शन: युवाओं की जवाबदेही की मांग
CJP प्रोटेस्ट लाइव अपडेट: कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पहुंचे, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के लगे नारे
राष्ट्रीय परीक्षाओं में प्रणालीगत विफलताओं को लेकर बढ़ते गुस्से के बीच, संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजधानी में एक जोरदार विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिससे शिक्षा मंत्रालय पर दबाव बढ़ गया है।
इस शनिवार दिल्ली का जंतर-मंतर एक प्रतीकात्मक युद्धक्षेत्र में बदल गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन लेकर राजधानी के केंद्र में पहुंची। विदेश से आए संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक हाथ में संविधान और दूसरे में संकल्प लिए समर्थकों के हुजूम का नेतृत्व किया। नारों से गूंजते माहौल में संदेश साफ था: खामोश रहने का दौर खत्म हो चुका है। पांच घंटे तक चला यह विरोध प्रदर्शन NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ एक सीधा जवाब था।
प्रदर्शनकारियों के लिए, यह सिर्फ एक परीक्षा या प्रशासनिक चूक का मामला नहीं है; यह अपने अस्तित्व को दर्ज कराने की लड़ाई है। मंच से दीपके ने पारंपरिक राजनीतिक विमर्श से हटकर तर्क दिया कि सरकार लंबे समय से युवाओं को केवल 'कीड़े-मकोड़े' समझकर नजरअंदाज कर रही है। 'कॉकरोच' शब्द को अपनाकर—जिसका इस्तेमाल अक्सर हाशिए पर पड़े लोगों को नीचा दिखाने के लिए किया जाता है—यह आंदोलन संकेत दे रहा है कि कैसे Gen Z और युवा पीढ़ी सत्ता के साथ जुड़ रही है। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की उपस्थिति ने शिक्षा क्षेत्र में आमूलचूल पारदर्शिता और प्रणालीगत सुधार की मांग को और तेज कर दिया।
जवाबदेही की मांग
प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट था: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। भारी सुरक्षा के बीच विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन माहौल में निराशा साफ देखी जा सकती थी। प्रतिभागियों ने पोस्टर और तिरंगा लेकर प्रदर्शन किया, जो एक महीने से चल रहे उस अभियान का हिस्सा है जिसने विभिन्न राज्यों में स्थानीय विरोध को जन्म दिया है। दीपके ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मंत्रालय परीक्षा प्रक्रिया में खोए भरोसे की जिम्मेदारी नहीं लेता है, तो यह आंदोलन 13 जून को फिर से दिल्ली लौटेगा और दबाव बढ़ाएगा।
इन घटनाओं का राजनीतिक असर पहले ही दिखने लगा है। जहां CJP शिक्षा मंत्रालय पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार जैसे मुख्यधारा के राजनेता भी इसमें शामिल हो गए हैं। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की लॉजिस्टिक खामियों, जैसे अबू धाबी जैसे दूरदराज के स्थानों पर परीक्षा केंद्र आवंटित करने की आलोचना की है। ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि पेपर लीक का मुद्दा सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत बनता जा रहा है, जिसे केवल सोशल मीडिया मैनेजमेंट या इंटरनेट प्रतिबंधों से नहीं दबाया जा सकता।
यह क्यों मायने रखता है: विरोध का बदलता स्वरूप
यह आंदोलन पारंपरिक, पार्टी-समर्थित सड़क राजनीति से बिल्कुल अलग है। कॉकरोच जनता पार्टी एक डिजिटल-फर्स्ट, विकेंद्रीकृत मॉडल पर काम कर रही है, जिसे स्थापित राजनीतिक मशीनरी के लिए वर्गीकृत करना या नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है। दलीय विचारधारा के बजाय 'जवाबदेही' पर ध्यान केंद्रित करके, वे लाखों छात्रों और अभिभावकों की गहरी चिंता को आवाज दे रहे हैं, जिन्हें लगता है कि मौजूदा शिक्षा ढांचा उन्हें विफल कर रहा है। सरकार के लिए अब असली चुनौती सिर्फ विरोध को संभालना नहीं, बल्कि उस ढांचागत गिरावट को ठीक करना है जिसने प्रतियोगी परीक्षाओं को राष्ट्रीय संकट का स्रोत बना दिया है। यदि प्रशासन इन आंदोलनों को महज 'ट्रेलर' मानता रहा, तो वे उस बढ़ते जन-आक्रोश को नजरअंदाज करने का जोखिम उठा रहे हैं जो तेजी से संगठित जमीनी विरोध में बदल रहा है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।