90 दिनों की सीमा: अमेरिकी अपीलीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की हिरासत शक्तियों पर लगाई लगाम
अदालत का फैसला: ट्रंप प्रशासन अब प्रवासियों को बिना बॉन्ड सुनवाई के 90 दिनों से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकता
पांचवें सर्किट कोर्ट के विभाजित फैसले ने प्रवासियों के लिए बॉन्ड सुनवाई को अनिवार्य कर दिया है, जो व्हाइट हाउस की सख्त आव्रजन नीति के लिए एक बड़ा कानूनी झटका है।
टेक्सास और लुइसियाना की सुविधाओं में बंद हजारों प्रवासियों के लिए अनिश्चितकालीन हिरासत का डर अब एक बड़ी कानूनी बाधा से टकरा गया है। गुरुवार को 2-1 के बहुमत से आए फैसले में, 5वें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने कहा कि ट्रंप प्रशासन किसी भी व्यक्ति को 90 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रख सकता, जब तक कि उन्हें बॉन्ड सुनवाई के जरिए रिहाई का उचित अवसर न दिया जाए।
यह फैसला सरकार के हालिया सख्त रुख पर एक कड़ा प्रहार है। हालांकि इसी अदालत की एक अन्य बेंच ने पहले संघीय कानून की प्रशासन की व्याख्या को मंजूरी दी थी, लेकिन गुरुवार की टिप्पणी अमेरिकी संविधान के दायरे को स्पष्ट करती है। जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा नियुक्त अमेरिकी सर्किट जज लेस्ली साउथविक ने बहुमत का फैसला लिखते हुए कहा कि पांचवें संशोधन के तहत मिलने वाले कानूनी अधिकार (due process) वैकल्पिक नहीं हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि अमेरिकी संविधान का 'ऐतिहासिक गौरव' कोई अपवाद नहीं छोड़ता, जो यह सुनिश्चित करता है कि देश की सीमाओं के भीतर मौजूद लोगों को भी अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए सुनवाई का अधिकार है।
संवैधानिक संघर्ष
यह मामला तीन व्यक्तियों—दो मैक्सिकन नागरिक और एक होंडुरास का नागरिक—से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी लंबी हिरासत को चुनौती दी थी। अमेरिकन इमिग्रेशन काउंसिल की उनकी कानूनी टीम ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे इस बात की पुष्टि बताया है कि सरकार के पास न्यायिक निगरानी के बिना प्रवासियों को अनिश्चितकाल तक जेल में रखने का अधिकार नहीं है।
हालांकि, अदालत अभी भी इस मुद्दे पर बंटी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नियुक्त जज कोरी विल्सन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि बहुमत की राय आव्रजन पर कांग्रेस के स्थापित अधिकार को कमजोर करती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी, जो ICE के संचालन का प्रबंधन करता है, ने अब तक इस फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह फैसला केवल एक प्रक्रियात्मक बदलाव नहीं है; यह कार्यकारी प्रवर्तन नीति और संवैधानिक प्रहरी के रूप में न्यायपालिका की भूमिका के बीच एक बुनियादी टकराव को दर्शाता है। 90 दिनों की समय-सीमा तय करके, अदालत ने प्रशासन की हालिया आव्रजन रणनीति की सामूहिक हिरासत वाली कार्यप्रणाली पर एक संरचनात्मक अंकुश लगा दिया है।
भारत और दुनिया भर के पर्यवेक्षकों के लिए, यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के दावों और संवैधानिक कानून की कठोर सीमाओं के बीच चल रहे तनाव को उजागर करता है। हालांकि सीमाओं और कानूनी स्थिति पर बहस अमेरिकी राजनीति का मुख्य विषय बनी हुई है, लेकिन यह फैसला रेखांकित करता है कि आक्रामक प्रवर्तन के माहौल में भी, अदालतें ही बुनियादी कानूनी अधिकारों की अंतिम संरक्षक हैं। चाहे प्रशासन इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे या अपनी हिरासत की समय-सीमा में बदलाव करे, '90-दिन का नियम' अब अमेरिकी आव्रजन प्रणाली की कानूनी, सामाजिक और मानवीय कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।