राबड़ी देवी के 'चूड़ी विवाद' को तेज प्रताप ने बताया बेबुनियाद, पवन सिंह की MLC जीत पर दी बधाई
'हीरे के हैं या सोने के... लोग खुशी में दान करते हैं', तेज प्रताप ने मां का किया सपोर्ट; पवन सिंह को दी बधाई
बिहार की राजनीति में चल रही गहमागहमी के बीच, आरजेडी नेता ने अपनी मां के गहनों से जुड़े हालिया विवाद पर अपनी बात रखी और एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।
पटना के सत्ता के गलियारों में हलचल तेज है क्योंकि बिहार विधान परिषद के चुनाव सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के साथ संपन्न हो गए हैं। जहां बीजेपी और जेडी(यू) ने चार-चार सीटें जीती हैं, वहीं आरजेडी और एलजेपी (राम विलास) ने एक-एक सीट हासिल की है। इस बीच, भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के एमएलसी के रूप में पदार्पण पर सबकी नजरें टिकी हैं। एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, तेज प्रताप यादव ने एक परिपक्व रुख अपनाते हुए अभिनेता से नेता बने पवन सिंह को सार्वजनिक रूप से बधाई दी है, जबकि वे राज्य की राजनीति में अक्सर दिखने वाले तीखे बयानों से दूर रहे।
शनिवार को मीडिया से बात करते हुए, आरजेडी नेता ने पवन सिंह के एमएलसी बनने पर नपा-तुला जवाब दिया। जब उनसे अभिनेता के मंत्री बनने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो तेज प्रताप ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि अगर ऐसा होता है, तो उन्हें अभी से बधाई। यह व्यावहारिक रुख उनके अन्य विषयों पर दिए गए बयानों से अलग है। जब उनसे 'खान सर' के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से उनका समर्थन नहीं करते हैं, और खुद को खेसारी लाल यादव जैसे आरजेडी समर्थकों से जुड़े विवादों से अलग कर लिया।
चूड़ी विवाद
बातचीत विधायी जीत से हटकर उनकी मां राबड़ी देवी से जुड़े हालिया 'चूड़ी विवाद' पर आ गई। इस मुद्दे पर जेडी(यू) ने एक लोक गायक द्वारा किए गए दावों के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से जांच की मांग की है, जिसे तेज प्रताप ने राई का पहाड़ बनाना बताया। राजनीतिक आक्रोश को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि गहना चाहे सोने का हो या हीरे का, कलाकार के प्रति सम्मान और स्नेह जताने के लिए प्रशंसक अक्सर ऐसी चीजें भेंट करते हैं। उन्होंने इस विवाद को एक मनगढ़ंत मुद्दा करार देते हुए कहा कि उपहार देना राज्य की संस्कृति का एक सामान्य और सहज हिस्सा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
तेज प्रताप के ये बयान बिहार की राजनीति की वर्तमान स्थिति को दर्शाते हैं। पवन सिंह को बधाई देकर—जो अक्सर बीजेपी समर्थित खेमे से जुड़े माने जाते हैं—तेज प्रताप शायद विपक्ष की एक अधिक व्यावहारिक और परिपक्व छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, 'चूड़ी विवाद' पर उनका बचाव दोहरे उद्देश्य को पूरा करता है: यह उनके परिवार को एक संभावित नुकसानदेह नैरेटिव से बचाता है और साथ ही सत्ताधारी गठबंधन की EOU जांच की मांग को राजनीतिक हताशा के रूप में पेश करता है। बिहार की राजनीति में, जहां हर कदम का चुनावी नफा-नुकसान देखा जाता है, तेज प्रताप का इन विवादों को सामान्य बताने का प्रयास यह दर्शाता है कि वे प्रतिक्रिया देने के बजाय नैरेटिव को नियंत्रित करना चाहते हैं।
यह दृष्टिकोण मतदाताओं को कितना प्रभावित करेगा, यह देखना बाकी है, लेकिन इस सप्ताह की बातचीत का primary source यह पुष्टि करता है कि आरजेडी सावधानी से चुन रही है कि उसे किन लड़ाइयों में शामिल होना है। सोशल मीडिया से प्रेरित घोटालों में उलझने के बजाय विधायी उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करके, पार्टी अपनी सार्वजनिक जुड़ाव रणनीति को फिर से तैयार करती दिख रही है। यह original article रेखांकित करता है कि हालांकि पटना में राजनीतिक तापमान अभी भी उच्च है, लेकिन तेज प्रताप यादव जैसे प्रमुख नेताओं की बयानबाजी अब अधिक रणनीतिक होती जा रही है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।