गोरखपुर के अस्पतालों में इलाज में लापरवाही का सिलसिला, प्रसूता की मौत के बाद हंगामे का वीडियो वायरल
गोरखपुर में प्रसूता की मौत के बाद परिजनों का अस्पताल के बाहर हंगामा, पुलिस ने पति पर बरसाए लात-घूसे और डंडे, Video
गोरखपुर और आसपास के जिलों में निजी अस्पतालों में कथित लापरवाही के कारण मरीजों की मौत और उसके बाद परिजनों के आक्रोश की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
गोरखपुर क्षेत्र के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत और उसके बाद प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में बस्ती-गोरखपुर मार्ग पर स्थित एक नर्सिंग होम में प्रसव के लिए भर्ती एक महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ। सोशल मीडिया पर एक video तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अस्पताल के बाहर परिजनों का गुस्सा फूटते देखा जा सकता है। परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत बिगड़ने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने न तो उचित इलाज किया और न ही समय पर डॉक्टरों को उपलब्ध कराया, जिसके चलते प्रसूता ने दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठते गंभीर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब गोरखपुर के निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर इस तरह के आरोप लगे हैं। कौड़ीराम स्थित रिया अस्पताल में भी ऑपरेशन के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की टीम ने संज्ञान लेते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है। इसी तरह के एक अन्य मामले में, बरगदही के रचित अस्पताल में इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया, जहाँ दुर्घटना के बाद भर्ती युवक की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए।
पुलिसिया कार्रवाई और बढ़ता तनाव
कई मामलों में अस्पताल के बाहर उपजे हंगामे को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस की कार्यप्रणाली भी चर्चा का विषय बनी है। वायरल वीडियो क्लिप्स में देखा जा सकता है कि कैसे तनावपूर्ण माहौल में पुलिस और परिजनों के बीच तीखी बहस हुई और कुछ स्थानों पर पुलिस को स्थिति संभालने के लिए बल का प्रयोग करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल संचालक अपनी गलती छिपाने के लिए अक्सर 'रेफर' करने का नाटक करते हैं, जबकि मरीज की स्थिति पहले ही नाजुक हो चुकी होती है। इन घटनाओं को लेकर ndtv और अन्य स्थानीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार खबरें प्रसारित हो रही हैं, जिससे आम जनता में निजी चिकित्सा सुविधाओं के प्रति अविश्वास गहरा रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब इन मामलों की जांच में जुट गया है। गगहा और पुरानी बस्ती थानों की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया है, लेकिन परिजनों की मांग है कि दोषी डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। Gorakhpur के इन अस्पतालों में एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं ने निजी चिकित्सा क्षेत्र में निगरानी की कमी को उजागर कर दिया है। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही का अभाव
इन घटनाओं का सीधा संबंध अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और मरीज के परिजनों के बीच संवाद की कमी से है। कई मामलों में परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें मरीज की वास्तविक स्थिति की जानकारी तब दी गई जब बहुत देर हो चुकी थी। चाहे health संबंधी मामले हों या लापरवाही के आरोप, यह स्पष्ट है कि चिकित्सा संस्थानों को अपने बुनियादी ढांचे और पारदर्शिता को लेकर अधिक जिम्मेदार होने की आवश्यकता है। इन घटनाओं का विवरण विभिन्न डिजिटल माध्यमों जैसे home-khabar और अन्य source पर भी देखा जा सकता है, जो समय-समय पर home- स्तर की समस्याओं को जनता के सामने लाते हैं।
पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क पूरे भारत से सत्यापित, स्रोत-आधारित राजनीतिक समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।