हमीदिया अस्पताल का बर्न वार्ड बना 'भट्ठी': भीषण गर्मी में कूलर के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहे मरीज
MP के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल का बर्न वार्ड या 'भट्ठी'? 41 डिग्री में कूलर के भरोसे तड़प रहे 90% तक जले मरीज
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बदहाल व्यवस्था का खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो पहले से ही 90 फीसदी तक झुलस चुके हैं।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल, जिसे राज्य का सबसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान माना जाता है, इन दिनों अपनी प्रशासनिक लापरवाही के चलते सुर्खियों में है। भीषण गर्मी के बीच, जब पारा 41 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा है, अस्पताल का बर्न वार्ड किसी 'भट्ठी' से कम नहीं लग रहा है। यहां भर्ती 90 प्रतिशत तक जले हुए गंभीर मरीजों को भीषण उमस और गर्मी के बीच सिर्फ कूलर के भरोसे छोड़ा गया है।
बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि बर्न वार्ड में संक्रमण को रोकने और मरीज को स्थिर रखने के लिए तापमान को नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, हमीदिया अस्पताल में एयर कंडीशनिंग सिस्टम की विफलता ने मरीजों के जीवन को और अधिक जोखिम में डाल दिया है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है, जिससे तीमारदारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
यह स्थिति तब है जब अस्पताल प्रबंधन को 'हेल्थ' और 'लाइफस्टाइल' की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए उच्च स्तरीय सावधानी बरतनी चाहिए थी। बर्न इंजरी के मामलों में, जहाँ शरीर की त्वचा का बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका होता है, वहां गर्मी और पसीना संक्रमण के बड़े कारक बनते हैं। अस्पताल का यह रवैया न केवल बुनियादी चिकित्सा मानकों का उल्लंघन है, बल्कि मरीज के रिकवरी की संभावनाओं को भी न्यूनतम कर देता है।
डिजिटल युग में जमीनी हकीकत
अक्सर आधिकारिक वेबसाइट्स और 'वेब स्टोरीज' के जरिए अस्पताल की सुविधाओं का बखान किया जाता है, लेकिन हकीकत इन डिजिटल दावों से कोसों दूर है। भले ही 'एनडीटीवी' (NDTV) जैसे प्लेटफॉर्म 'स्पोर्ट्स', 'क्रिकेट' या अन्य 'लाइफस्टाइल' की खबरें साझा करते हैं, लेकिन हमीदिया जैसे संस्थानों की आंतरिक अव्यवस्था यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में सुधार की कितनी आवश्यकता है। 'होम-खबर' के दायरे में आने वाली ये घटनाएं प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
आगे की राह
अस्पताल के 'होम-पेज' और 'इमेज' गैलरी में चमकती हुई तस्वीरें अक्सर दावों को सच साबित करने के लिए काफी होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों का दर्द अनसुना है। यदि अस्पताल प्रशासन समय रहते एयर कंडीशनिंग की मरम्मत या बेहतर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता है, तो यह लापरवाही मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती है। इस मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का हस्तक्षेप अनिवार्य हो गया है।
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