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हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटकों से थर्राया चंबा, कई बार हिली धरती

चंबा और हिमाचल के अन्य जिलों में महसूस किए गए 5.0 तीव्रता के भूकंप के झटके

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 5 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटकों से थर्राया चंबा
हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटकों से थर्राया चंबा

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के कई झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। चंबा क्षेत्र में महसूस किए गए इन झटकों का असर उत्तर भारत के कई इलाकों तक देखा गया।

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में इस सप्ताह भूगर्भीय हलचल तेज रही, जिससे चंबा जिला बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालांकि 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'द ट्रिब्यून' जैसी मीडिया रिपोर्ट्स में शुरुआत में 5.0 तीव्रता के एक बड़े भूकंप का जिक्र था, लेकिन भूकंपीय निगरानी केंद्रों के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि शुक्रवार से अब तक क्षेत्र में 3.3 से 4.5 तीव्रता के कई छोटे-बड़े झटके दर्ज किए गए हैं।

भूकंप के झटकों का सिलसिला

भूकंपीय गतिविधियां मुख्य रूप से चंबा बेल्ट में केंद्रित रही हैं, जिसे टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट रूप से कंपन महसूस किया, जिससे इलाके में डर का माहौल है। भूकंप की सटीक तीव्रता को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आ रही हैं, क्योंकि कम समय में बार-बार आए झटकों को मापना चुनौतीपूर्ण होता है; कुछ एजेंसियों ने इसे 3.3 और 4.0 तीव्रता का बताया है, तो कुछ अनुमानों के अनुसार यह 4.5 से 5.0 के बीच रहा है।

ये झटके केवल चंबा तक ही सीमित नहीं रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमाचल के कई अन्य हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों और उत्तर भारत के कुछ इलाकों में भी कंपन महसूस किया गया। कुछ सूत्रों का कहना है कि कम समय के भीतर जिले में यह छठी बार है जब भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

क्षेत्रीय संदर्भ और सुरक्षा

हिमाचल में आया यह भूकंप इस बात की याद दिलाता है कि पूरा राज्य उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में स्थित है। हिमालयी बेल्ट भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच निरंतर टकराव के कारण अक्सर छोटे-बड़े भूकंपों का केंद्र बनी रहती है। हालांकि हालिया झटकों को हल्का से मध्यम श्रेणी में रखा गया है, लेकिन चंबा और धर्मशाला जैसे क्षेत्रों में इनकी आवृत्ति प्रशासन को एहतियाती कदम उठाने के लिए मजबूर करती है।

फिलहाल, चंबा में आए इन झटकों से किसी बड़े नुकसान या जनहानि की कोई व्यापक खबर नहीं है, हालांकि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी तरह की भूगर्भीय अस्थिरता पड़ोसी जम्मू-कश्मीर में भी देखी गई है, जहां हाल ही में 5.4 तीव्रता के भूकंप ने डोडा जिले में घरों को नुकसान पहुंचाया था। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य के खतरों को कम करने के लिए भूकंप-रोधी निर्माण मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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