उत्तराखंड में भीषण गर्मी का प्रकोप: हल्द्वानी का पारा 39°C पर, शुष्क मौसम से राहत नहीं
उत्तराखंड में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी, हल्द्वानी में 39 डिग्री पहुंचा पारा
राज्य भर में जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, हल्द्वानी और देहरादून के निवासी भीषण गर्मी से बेहाल हैं और उन्हें फिलहाल चिलचिलाती धूप से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
इस सप्ताह उत्तराखंड में सूरज का कहर जारी है, जिससे दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। शुक्रवार को हल्द्वानी में तापमान 39°C तक पहुंच गया, जिसके चलते दिन के समय शहर की सड़कें सूनी नजर आईं। स्थानीय लोग सड़कों के किनारे पेड़ों की छांव में पनाह लेने को मजबूर हैं, क्योंकि शहर ने हाल के वर्षों में सबसे दमघोंटू मौसम का अनुभव किया है। लगातार चल रही पूर्वी हवाओं के कारण बढ़ी हुई उमस ने गर्मी को और अधिक कष्टदायक बना दिया है, और हल्द्वानी में रात का तापमान राज्य की राजधानी देहरादून से भी अधिक दर्ज किया जा रहा है।
गर्मी की चपेट में पूरा राज्य
मौजूदा मौसम का मिजाज लंबे शुष्क दौर (ड्राई स्पेल) के कारण बना हुआ है। ऊधम सिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों और राजधानी के कुछ हिस्सों में तापमान लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। जहां देहरादून में हाल ही में तापमान 37°C से 38°C के आसपास रहा, वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में पारा समय-समय पर 40°C के आंकड़े को पार कर रहा है। जागरण द्वारा एकत्रित रिपोर्टों सहित क्षेत्र भर के मौसम संबंधी आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि बारिश की कमी के कारण वातावरण शुष्क बना हुआ है और जमीन सूख रही है, जिससे गर्म हवाओं का असर और बढ़ गया है।
जहां मैदानी इलाके गर्मी से जूझ रहे हैं, वहीं पहाड़ी जिले भी इससे पूरी तरह अछूते नहीं हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में भी हवा की सामान्य ठंडक की जगह असामान्य गर्मी ने ले ली है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में छिटपुट हल्की बारिश की संभावना जताई है, लेकिन ये घटनाएं तापमान में वह जरूरी गिरावट लाने में विफल रही हैं, जिसकी स्थानीय लोग बेसब्री से उम्मीद कर रहे हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: बदलता शहरी माइक्रो-क्लाइमेट
लगातार पड़ रही यह भीषण गर्मी उत्तराखंड के बढ़ते शहरी केंद्रों के लिए एक बड़ी चुनौती है। हल्द्वानी में देहरादून की तुलना में रात का तापमान अधिक दर्ज होना 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव की ओर इशारा करता है, जहां कंक्रीट की इमारतें गर्मी को सोख लेती हैं और सूर्यास्त के बाद भी शहर को ठंडा नहीं होने देतीं। यह केवल व्यक्तिगत असुविधा का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी दबाव डालता है। जैसे-जैसे राज्य प्री-मानसून की अचानक बारिश और भीषण शुष्क गर्मी के बीच इन अनिश्चित बदलावों का सामना कर रहा है, जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।
आगे क्या उम्मीद करें
फिलहाल, मौसम का पूर्वानुमान कोई खास राहत नहीं दे रहा है। कम से कम 25 जून तक मौसम के शुष्क बने रहने की संभावना है, जिसके चलते राज्य हाई अलर्ट पर है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं गरज के साथ बौछारें और तेज हवाएं चल सकती हैं, लेकिन भीषण गर्मी झेल रहे मैदानी इलाकों को राहत मिलने के आसार कम हैं। अधिकारियों ने नागरिकों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है, क्योंकि राज्य अब मानसून के आगमन का इंतजार कर रहा है ताकि इस भीषण गर्मी के चक्र को तोड़ा जा सके।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।