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RPSC की नई रफ्तार: 47 लाख अभ्यर्थी, 187 परीक्षाएं और भर्ती का नया मानक

आरपीएससी ने एक साल में 47 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए 187 से अधिक परीक्षाओं का किया आयोजन

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 19 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
RPSC की नई रफ्तार: 47 लाख अभ्यर्थी, 187 परीक्षाएं और भर्ती का नया मानक
RPSC की नई रफ्तार: 47 लाख अभ्यर्थी, 187 परीक्षाएं और भर्ती का नया मानक

उत्कल रंजन साहू का कार्यकाल समाप्त होने के साथ, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने भर्ती दक्षता और प्रक्रिया में पारदर्शिता में भारी वृद्धि दर्ज की है।

राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन ने काम करने की एक नई लय पकड़ी है। अजमेर स्थित आरपीएससी मुख्यालय में, निवर्तमान अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू ने हाल ही में एक प्रदर्शन रिपोर्ट पेश की, जो राज्य में भर्ती की गति में आई उल्लेखनीय तेजी को दर्शाती है। पिछले एक साल में, आयोग ने एक लॉजिस्टिक मैराथन की तरह काम करते हुए 47 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए 187 से अधिक परीक्षाएं आयोजित की हैं। उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए, जो अक्सर भर्ती चक्र में देरी से परेशान रहते थे, ये आंकड़े एक अधिक पूर्वानुमानित प्रणाली की ओर बढ़ते जरूरी कदम हैं।

रिकॉर्ड तोड़ भर्ती का एक साल

इस बदलाव के पीछे के आंकड़े काफी प्रभावशाली हैं। जून 2025 में कार्यभार संभालने के बाद, साहू की टीम ने "राइट टाइम पॉलिसी" पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। यह पहल यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी कि परीक्षाएं पूर्व-निर्धारित कैलेंडर के अनुसार ही हों। मनमाने ढंग से परीक्षा कार्यक्रम तय करने की पुरानी व्यवस्था से हटकर यह कदम छात्र संगठनों की वर्षों पुरानी मांग रही है। डेटा बताता है कि यह केवल समय सारिणी की बात नहीं है, बल्कि कार्यक्षमता की भी है। केवल एक वर्ष के भीतर, आयोग ने सरकारी नौकरियों के लिए 10,220 उम्मीदवारों की सिफारिश की, जो 2024 की शुरुआत से अब तक की कुल 16,218 सिफारिशों का एक बड़ा हिस्सा है।

तकनीक और '7-लेवल' सुरक्षा कवच

संख्याओं के अलावा, आयोग प्रश्नपत्रों की पवित्रता को लेकर कड़ी निगरानी में रहा है। पेपर लीक के खतरे को रोकने के लिए, आरपीएससी ने एक मजबूत 7-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया है। इसमें न्यूमेरिक लॉक का उपयोग और बेहतर हैंडलिंग प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिसका उद्देश्य योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया में विश्वास बहाल करना है। इन घटनाक्रमों पर नजर रखने वालों के लिए, यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है—जो पारंपरिक कागजी बाधाओं से हटकर तकनीक-सक्षम और सुरक्षित मूल्यांकन प्रणाली की ओर बढ़ रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: दक्षता का लाभ

गतिविधियों में यह उछाल राज्य की प्रशासनिक क्षमता के लिए एक लिटमस टेस्ट की तरह है। जब कोई आयोग 12 महीनों में 187 परीक्षाएं आयोजित करता है, तो इसके निहितार्थ केवल भर्ती से कहीं अधिक होते हैं; यह राज्य के कार्यबल के लिए 'प्रतीक्षा समय' में कमी का संकेत देता है। 14,500 से अधिक पदों को कवर करने वाले 16 प्रमुख विज्ञापनों के बैकलॉग को साफ करके, आरपीएससी विभिन्न सरकारी विभागों के लिए प्रतिभा पाइपलाइन को स्थिर करने का प्रयास कर रहा है।

हालांकि, आयोग के लिए असली चुनौती निरंतरता बनाए रखना है। जबकि पिछले 12 महीनों का समय स्पष्ट रूप से गति के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है, इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या नए नेतृत्व में भी यह प्रशासनिक गति बनी रह सकती है। उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए, जो अपडेट के लिए आधिकारिक पोर्टल पर ईमेल दर्ज करते हैं या न्यूजलेटर सब्सक्राइब करते हैं, उम्मीद यही है कि यह 'राइट टाइम' नीति एक अस्थायी चरण के बजाय एक स्थायी व्यवस्था बन जाए।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।