तमिलनाडु पर मंडराता खतरा: यौन अपराधों के खिलाफ जनता के आक्रोश के बीच BJP का दबाव
महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों को लेकर BJP ने तमिलनाडु सरकार को घेरा
राज्य BJP ने हाल ही में हुई कई भयावह घटनाओं के बाद एक बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। पार्टी ने सत्ताधारी सरकार पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
गुम्मीदीपुंडी के पास तीन साल की बच्ची की दुखद मौत तमिलनाडु में राजनीतिक तूफान का केंद्र बन गई है। इस मामले में बिहार के एक 19 वर्षीय प्रवासी मजदूर को गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। कई परिवारों के लिए, यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में सुरक्षा के बढ़ते संकट का एक भयावह प्रतिबिंब है।
BJP का विरोध का आह्वान
तमिलनाडु BJP प्रमुख नैनार नागेंद्रन ने TVK के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दावा किया है कि नागरिक लगातार खतरे के साये में जी रहे हैं। नागेंद्रन द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद कि राज्य में एक ही दिन में बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के पांच अलग-अलग मामले दर्ज किए गए, पार्टी का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है।
इन आंकड़ों को प्रणालीगत विफलता का सबूत बताते हुए, BJP ने 18 जून को चेन्नई में एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। पार्टी नेतृत्व ने सत्ताधारी सरकार से तत्काल और ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका तर्क है कि पिछले चुनाव में जिस बदलाव का वादा किया गया था, उसकी जगह अब डर का माहौल ले चुका है।
बढ़ता राजनीतिक टकराव
सरकार पर चारों तरफ से दबाव बढ़ रहा है। जहां BJP सड़कों पर उतरकर लामबंद हो रही है, वहीं राज्य में राजनीतिक माहौल भी गरमाया हुआ है। सरकार इन आरोपों का सामना कर रही है, वहीं एम.के. स्टालिन जैसे पूर्व नेताओं सहित अन्य राजनीतिक दिग्गज भी इस विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। विपक्ष के कई नेता बच्चों की सुरक्षा पर प्रमुख हस्तियों की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। ये घटनाक्रम बताते हैं कि राज्य का राजनीतिक परिदृश्य तेजी से ध्रुवीकृत हो रहा है, जबकि सरकार जन आक्रोश को थामने के लिए संघर्ष कर रही है।
बड़ी तस्वीर
यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है? तमिलनाडु के लिए, महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा का सवाल मौजूदा सरकार की कार्यक्षमता के लिए एक लिटमस टेस्ट बनता जा रहा है। जब नाबालिगों के खिलाफ हिंसा के ऐसे हाई-प्रोफाइल मामले सामने आते हैं, तो वे जनता का भरोसा कम करते हैं और सरकार को बचाव की मुद्रा में ला देते हैं। सुर्खियों से परे, यह राज्य की कानून प्रवर्तन मशीनरी के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि सरकार इन अपराधों पर सख्त और त्वरित कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो वह अपनी नैतिक और राजनीतिक पकड़ खो सकती है। इससे उस प्रतिस्पर्धी राजनीतिक माहौल में विमर्श बदल सकता है जहां विपक्ष हर नीतिगत विफलता को बड़ा मुद्दा बनाता है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।