Politicalpedia
बिज़नेस

रिटायरमेंट प्लानिंग: SCSS स्कीम के जरिए हर महीने कैसे पाएं 20,500 रुपये की कमाई

इस सरकारी स्कीम में हर महीने मिलेगा 20,500 रुपये तक ब्याज, जानें कौन-कौन कर सकता है निवेश

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 2 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
रिटायरमेंट प्लानिंग: SCSS स्कीम के जरिए हर महीने कैसे पाएं 20,500 रुपये की कमाई
रिटायरमेंट प्लानिंग: SCSS स्कीम के जरिए हर महीने कैसे पाएं 20,500 रुपये की कमाई

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) रिटायर हो चुके लोगों को एक सरकारी गारंटी वाला विकल्प देती है, जिससे वे हर महीने 20,500 रुपये तक का निश्चित ब्याज प्राप्त कर सकते हैं।

कई रिटायर हो चुके लोगों के लिए सुरक्षित और नियमित आय का जरिया तलाशते समय पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरती है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच, यह सरकारी स्कीम स्थिरता प्रदान करती है। वर्तमान में, यह स्कीम 8.2% की आकर्षक सालाना ब्याज दर दे रही है, जो कई पारंपरिक बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर है।

निवेश का गणित

हर महीने 20,500 रुपये का ब्याज पाने के लिए, एक व्यक्ति को इसमें अधिकतम 30 लाख रुपये का निवेश करना होगा। 8.2% की मौजूदा ब्याज दर के हिसाब से, यह निवेश सालाना 2.46 लाख रुपये का ब्याज देता है। चूंकि SCSS में ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर होता है, इसलिए निवेशकों को हर तीन महीने में 61,500 रुपये मिलते हैं, जो औसत रूप से 20,500 रुपये प्रति माह बैठता है।

इसमें निवेश की शुरुआत मात्र 1,000 रुपये से की जा सकती है। हालांकि यह स्कीम मुख्य रूप से 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए है, लेकिन 55 से 60 वर्ष की आयु के बीच स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वालों और 50 वर्ष से अधिक आयु के सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों के लिए विशेष छूट दी गई है।

लचीलापन और टैक्स के नियम

यह स्कीम पांच साल की मैच्योरिटी अवधि के लिए होती है, जिसे निवेशक तीन और वर्षों के लिए बढ़ा सकते हैं। पति-पत्नी के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि वे अलग-अलग खाते खोलें, क्योंकि 30 लाख रुपये की सीमा प्रति पैन कार्ड है। इस तरह, एक दंपत्ति कुल 60 लाख रुपये का निवेश कर सकता है, जिससे उनकी मासिक आय बढ़कर 41,000 रुपये हो सकती है।

टैक्स के नजरिए से, SCSS इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ देती है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है और यह लाभ केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ही उपलब्ध है। इसके अलावा, समय से पहले निकासी पर जुर्माना लगता है; पहले साल में खाता बंद करने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, और दो से पांच साल के बीच बंद करने पर मूलधन का 1% काटा जाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: एक बड़ी तस्वीर

यह स्कीम भारतीय परिवारों के वित्तीय रुझान को दर्शाती है: जहां लोग उच्च जोखिम वाले निवेश के बजाय 'सरकारी गारंटी' को प्राथमिकता देते हैं। ब्याज दरें स्थिर रहने के कारण, SCSS बुजुर्गों के लिए महंगाई से निपटने का एक अहम जरिया है। भले ही इसके रिटर्न आक्रामक बाजार साधनों से कम हों, लेकिन क्रेडिट जोखिम न होने के कारण यह उन लोगों के लिए एक मजबूत आधार है जो अपनी रिटायरमेंट की जमा-पूंजी को जोखिम में नहीं डाल सकते। औसत निवेशक के लिए, यह संपत्ति बनाने से ज्यादा जीवन यापन के खर्चों को बाजार की चिंताओं से मुक्त रखने का जरिया है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।