राम मंदिर चंदा विवाद: आरोपों की बौछार और जवाबदेही की बढ़ती मांग
लखनऊ में चम्पत राय के खिलाफ पुलिस से शिकायत: राम मंदिर चंदा चोरी मामला, सवर्ण मोर्चा ने 4 लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई।
लखनऊ और अयोध्या में एसआईटी की जांच तेज होने के साथ ही, मंदिर के चढ़ावे को लेकर लगे आरोपों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अभूतपूर्व जांच के दायरे में ला खड़ा किया है।
गर्भगृह की शांति अब राजनीतिक और कानूनी दांव-पेंच के शोर में बदल गई है। लखनऊ में, सवर्ण मोर्चा के सदस्यों ने हाल ही में हजरतगंज कोतवाली तक मार्च निकाला। शंखनाद के बीच उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और तीन अन्य लोगों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। आरोप गंभीर हैं: प्रणालीगत अनियमितताएं और राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नकद, सोने और चांदी की कथित हेराफेरी।
आरोप और शिकायतकर्ता
लखनऊ में दर्ज शिकायत असंतोष के बढ़ते स्वर को दर्शाती है। ऐसी ही शिकायतें अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में शिकायतकर्ता संतोष दुबे द्वारा दर्ज कराई गई हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोपियों—चम्पत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और टिन्टू यादव—का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग की है। ये आरोप केवल सिक्कों के गायब होने तक सीमित नहीं हैं; इनमें हेरफेर की गई अकाउंटिंग के जरिए 200 करोड़ रुपये से अधिक के गबन और कीमती चढ़ावे के कुप्रबंधन का दावा किया गया है, जिसे प्रोटोकॉल के अनुसार दान पेटियों से सीधे बैंक वॉल्ट में जाना चाहिए था।
आग में घी डालते हुए, मंदिर के पूर्व अकाउंट प्रभारी महिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि इन विसंगतियों को उजागर करने के बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि सबूत मिटाने के लिए आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए। जहां समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को एक बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया है, वहीं भगवा खेमे के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता और राम मंदिर आंदोलन के स्तंभ विनय कटियार ने खुलकर सवाल उठाया है कि मंदिर का चढ़ावा कथित तौर पर निजी आवासों तक क्यों ले जाया जा रहा था, और इसे प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन बताया है।
एसआईटी जांच
राज्य प्रशासन ने मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें आईजी किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। टीम ने मंदिर परिसर में लगातार कई दिन बिताए हैं और ट्रस्ट के अधिकारियों, पुजारियों और बैंक प्रतिनिधियों सहित सौ से अधिक लोगों से पूछताछ की है। जांच फिलहाल दान की कस्टडी चेन और निगरानी प्रणालियों द्वारा छोड़े गए डिजिटल फुटप्रिंट्स पर केंद्रित है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है
यह विवाद ट्रस्ट के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। तत्काल कानूनी लड़ाइयों से परे, यह स्थिति एक स्मारकीय राष्ट्रीय परियोजना में जनता के भरोसे के मूल को छूती है। हालांकि ट्रस्ट का कहना है कि भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधियों के साथ किए गए उनके आंतरिक ऑडिट में कोई विसंगति नहीं मिली है, लेकिन एसआईटी जांच का जारी रहना यह दर्शाता है कि प्रशासन पर एक स्पष्ट जवाब देने का दबाव है। इन घटनाक्रमों की ब्रेकिंग प्रकृति, जिसे अक्सर navbharattimes और indiatimes जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रैक किया जाता है, यह दर्शाती है कि कैसे आस्था और दान प्रबंधन का मिलन तेजी से राजनीतिक अस्थिरता का केंद्र बन सकता है। चाहे इसका परिणाम प्रशासनिक सुधार हो या उच्च-प्रोफाइल धार्मिक संस्थानों में पूर्ण पारदर्शिता की आवश्यकता की याद दिलाना, इसके निष्कर्षों का मंदिर के संचालन पर स्थायी प्रभाव पड़ेगा।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।