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संपत्ति विवाद बना जानलेवा: प्रोफेसर की हत्या के लिए कोलकाता से दिल्ली तक रची गई खौफनाक साजिश

रिश्तेदार की हत्या के लिए कोलकाता से दिल्ली का सफर और फिर वापसी: कैसे पकड़े गए DU प्रोफेसर के कातिल

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 7 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
संपत्ति विवाद बना जानलेवा: प्रोफेसर की हत्या के लिए कोलकाता से दिल्ली तक रची गई खौफनाक साजिश
संपत्ति विवाद बना जानलेवा: प्रोफेसर की हत्या के लिए कोलकाता से दिल्ली तक रची गई खौफनाक साजिश

पुश्तैनी घर को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बड़ी त्रासदी में बदल गया, जब जांचकर्ताओं ने दो किराएदारों द्वारा दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक शिक्षिका को रास्ते से हटाने की सोची-समझी साजिश का खुलासा किया।

दिल्ली यूनिवर्सिटी की 45 वर्षीय असिस्टेंट प्रोफेसर की निर्मम हत्या ने शैक्षणिक जगत को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला लालच और ठंडे दिमाग से की गई साजिश की एक खौफनाक दास्तां बयां करता है। वसुंधरा एन्क्लेव स्थित उनके अपार्टमेंट में मृत पाई गईं प्रोफेसर के चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें थीं, और उनकी कलाइयां भी कटी हुई थीं। यह हत्या उन दो दूर के रिश्तेदारों द्वारा की गई थी, जो पश्चिम बंगाल में उनकी संपत्ति में किराएदार के रूप में रह रहे थे।

पुश्तैनी संपत्ति का विवाद

इस त्रासदी की जड़ें पश्चिम बंगाल के बर्दवान में स्थित एक पुश्तैनी संपत्ति में थीं, जिस पर आरोपी दंपत्ति 2023 से कब्जा जमाए हुए थे। पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर को यह घर पारिवारिक समझौते के तहत मिला था। हालांकि उनके माता-पिता और भाई-बहन संपत्ति बेचने के लिए तैयार थे, लेकिन प्रोफेसर ही एकमात्र बाधा बनी हुई थीं और उन्होंने इस सौदे के लिए सहमति देने से साफ इनकार कर दिया था।

जैसे-जैसे घर खाली करने का दबाव बढ़ता गया, पीड़िता ने दंपत्ति को आखिरी चेतावनी दे दी। जांचकर्ताओं का मानना है कि यही चेतावनी घटना का टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसके बाद दंपत्ति ने उस महिला को रास्ते से हटाने की हिंसक साजिश रची, जिसे वे अपने वित्तीय हितों के लिए सबसे बड़ी बाधा मान रहे थे।

साजिश से अंजाम तक

इस अपराध की योजना में हैरान कर देने वाली पूर्व-नियोजित तैयारी दिखी। 3 जून को, दंपत्ति ने हत्या को अंजाम देने के लिए कोलकाता से दिल्ली तक 1,400 किलोमीटर का सफर तय किया। प्रोफेसर उन्हें जानती थीं, इसलिए वे बिना किसी जबरदस्ती के उनके छठे मंजिल वाले अपार्टमेंट में दाखिल होने में सफल रहे।

अंदर घुसते ही स्थिति हिंसक हो गई और उन्होंने प्रोफेसर की हत्या कर दी। 4 जून को घटना को अंजाम देने के बाद, दोनों वापस पश्चिम बंगाल भागने की फिराक में थे, ताकि अपने गृह राज्य की भीड़ में गायब होकर पकड़े जाने से बच सकें। हालांकि, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वित प्रयासों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनकी कोलकाता से दिल्ली तक की पूरी यात्रा का पर्दाफाश कर दिया।

मामले के व्यापक निहितार्थ

यह मामला विस्तारित परिवारों के बीच संपत्ति विवादों की बढ़ती अस्थिरता को उजागर करता है, जहां पुरानी रंजिशें अक्सर चरम हिंसा का रूप ले लेती हैं। हालांकि जांच अभी जारी है, लेकिन यह घटना रियल एस्टेट को लेकर कानूनी और व्यक्तिगत संघर्षों में फंसे लोगों की असुरक्षा की एक कड़वी याद दिलाती है। हिंदुस्तान टाइम्स सहित विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दंपत्ति की त्वरित गिरफ्तारी ने शोक संतप्त परिवार को कुछ राहत दी है, लेकिन इस अपराध की भयावहता अनसुलझे संपत्ति विवादों के खतरों को साफ तौर पर दर्शाती है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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