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राजनीतिक उथल-पुथल और ठप जनजीवन: कोलकाता से मुंबई तक अशांति भरा शुक्रवार

भास्कर अपडेट्स: TMC के राष्ट्रीय महासचिव सांसद अभिषेक बनर्जी लोकसभा स्पीकर से मिले, बागी सांसदों के खिलाफ 20 याचिकाएं सौंपीं।

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 19 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
राजनीतिक उथल-पुथल और ठप जनजीवन: कोलकाता से मुंबई तक अशांति भरा शुक्रवार
राजनीतिक उथल-पुथल और ठप जनजीवन: कोलकाता से मुंबई तक अशांति भरा शुक्रवार

TMC की आंतरिक दरारों से लेकर BEST बस हड़ताल तक, आज की उन प्रमुख राष्ट्रीय सुर्खियों पर एक नज़र जो देश की स्थिति को बयां कर रही हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गर्मी चरम पर है, और इसी के साथ देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नई दिल्ली में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आंतरिक असंतोष के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज कर दिया है, जो पार्टी की कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव है। दैनिक भास्कर के ताजा अपडेट के अनुसार, TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए 20 याचिकाएं सौंपीं।

बनर्जी का यह कदम उन सांसदों को निशाना बनाता है जिन्होंने खुद को 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) से जुड़ा बताया है। TMC नेतृत्व का रुख स्पष्ट है: यदि कोई सदस्य किसी विशेष पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतता है और कार्यकाल के बीच में ही किसी नए राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है, तो वह अपना जनादेश खो देता है। यह नेशनल ब्रेकिंग घटनाक्रम पार्टी आलाकमान द्वारा दलबदल और आंतरिक बगावत के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दर्शाता है।

बंगाल में नेतृत्व का संकट

इसी बीच, TMC राज्य स्तर पर नेतृत्व के खालीपन से भी जूझ रही है। पूर्व मंत्री और पार्टी के वफादार नेता ज्योतिप्रिय मल्लिक ने किडनी की समस्याओं और अनियंत्रित ब्लड शुगर का हवाला देते हुए सभी पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही सिलीगुड़ी के मेयर और उत्तर बंगाल के कद्दावर नेता गौतम देव का अपने पद से हटना, पार्टी के लिए एक कठिन दौर का संकेत है। ये केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं हैं, बल्कि बंगाल में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में हो रहे बड़े बदलाव को दर्शाते हैं।

मुंबई के यात्रियों की मुसीबत

जहां दिल्ली और कोलकाता के राजनीतिक गलियारे अस्थिर हैं, वहीं मुंबई में आम जनजीवन थम सा गया है। BEST कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने शहर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को पंगु बना दिया है, जिससे लगभग 25 लाख यात्री परेशान हैं। 27 डिपो में बस सेवाएं न्यूनतम होने के कारण, यात्रियों को लोकल ट्रेन, ऑटो और टैक्सी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान से लेकर अनुबंध श्रम प्रणाली में बदलाव तक, कर्मचारियों की मांगों ने शहर की परिवहन व्यवस्था को ठप कर दिया है।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

ये घटनाएं, भले ही भौगोलिक रूप से अलग हों, लेकिन एक व्यवस्थित दबाव के पैटर्न को रेखांकित करती हैं। बागी नेताओं के प्रति TMC का आक्रामक कानूनी रुख राजनीतिक ध्रुवीकरण के दौर में बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाता है। वहीं, BEST की हड़ताल महामारी के बाद के आर्थिक माहौल में श्रम अधिकारों और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाती है। चाहे संसदीय जनादेश की स्थिरता हो या शहरी परिवहन की विश्वसनीयता, सामान्य बात यह है कि स्थापित प्रणालियों पर आंतरिक असंतोष और शिकायतों को सुलझाने का दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिन यह तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि क्या ये संस्थान व्यवस्था बहाल कर पाएंगे या यह मौजूदा संकट राजनीतिक और नागरिक जवाबदेही में किसी स्थायी बदलाव का संकेत है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।