सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म: प्रतिमा मंडल ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की खबरों को नकारा
टीएमसी सांसद ने मुलाकात से किया इनकार: प्रतिमा मंडल ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलने की खबरों को सिरे से खारिज किया

तृणमूल कांग्रेस की सांसद ने भाजपा नेतृत्व के साथ किसी भी गुप्त बैठक की अटकलों को खारिज करते हुए जोर देकर कहा है कि वह कोलकाता से बाहर नहीं गई हैं।
दिल्ली के सत्ता के गलियारों में दलबदल की चर्चाएं कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन इस हफ्ते अफवाहों का बाजार चरम पर रहा। ऐसी खबरें सामने आईं कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चार महिला सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से सलाह-मशविरा करने के लिए गुपचुप तरीके से राष्ट्रीय राजधानी पहुंची थीं। इस चर्चा में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी का भी दावा किया गया, जिससे टीएमसी के भीतर बड़ी हलचल के कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, जब इस कथित प्रतिनिधिमंडल में शामिल बताई जा रहीं प्रतिमा मंडल ने इन खबरों का सख्ती से खंडन किया, तो स्थिति पूरी तरह बदल गई।
मंडल ने इन रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वह 4 जून के बाद से दिल्ली नहीं गई हैं। उनके अनुसार, जिस समय यह कथित बैठक होने का दावा किया जा रहा है, उस दौरान वह कोलकाता स्थित अपने आवास पर ही थीं। उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है।
चौथे सदस्य का रहस्य
जहां मंडल ने खुद को इस विवाद से दूर कर लिया है, वहीं अन्य कथित प्रतिभागियों की स्थिति अभी भी बहस का विषय बनी हुई है। खबरों में सयानी घोष, माला रॉय और मिताली बाग के उस समूह का हिस्सा होने का दावा किया गया था, लेकिन चौथे व्यक्ति की पहचान अभी भी रहस्य बनी हुई है। इस अस्पष्टता ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और हवा दे दी है, खासकर तब जब ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि टीएमसी के 14 बागी विधायक संभावित रूप से पार्टी छोड़ने को लेकर शुभेंदु अधिकारी के संपर्क में हैं।
इन दावों का समय बेहद संवेदनशील है। टीएमसी इस समय एक जटिल राजनीतिक दौर से गुजर रही है और ममता बनर्जी 'इंडिया' गठबंधन के साथ महत्वपूर्ण बैठकों में व्यस्त हैं, ऐसे में आंतरिक कलह की कोई भी आहट बड़ी बन जाती है। आधिकारिक खंडन और मीडिया में चल रही लगातार खबरों के बीच का यह विरोधाभास मौजूदा राजनीतिक माहौल की नाजुक स्थिति को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
इसका व्यापक महत्व केवल एक बैठक के बारे में नहीं है; यह कमजोरी की धारणा के बारे में है। भारतीय राजनीति में, किसी गुप्त बैठक की 'लीक' कहानी का इस्तेमाल अक्सर माहौल भांपने या प्रतिद्वंद्वी खेमे पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। टीएमसी सांसद के रूप में मुलाकात की खबरों का स्पष्ट खंडन करके, प्रतिमा मंडल नैरेटिव को अपने पक्ष में करने और पार्टी की उस एकजुटता को पेश करने की कोशिश कर रही हैं, जिसकी टीएमसी को इस समय सख्त जरूरत है।
चाहे ये खबरें आंतरिक असंतोष का संकेत हों या महज रणनीतिक शोर, ये उच्च अस्थिरता के दौर का संकेत देती हैं। एक पर्यवेक्षक के लिए, कथित उपस्थिति और उसके बाद के खंडन के बीच का अंतर यह बताता है कि प्रभाव की लड़ाई जितनी विधानसभा में लड़ी जा रही है, उतनी ही सुर्खियों में भी। जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, ध्यान इस बात पर रहेगा कि क्या ये अफवाहें व्यवस्थित हैं या केवल राजनीतिक पैंतरेबाजी की छिटपुट घटनाएं।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।