Politicalpedia
राष्ट्रीय

PoK का विलय बस दो दिन दूर था: लखनऊ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बड़ा दावा

ऑपरेशन सिंदूर दो दिन और चलता तो PoK भारत में होता: जगद्गुरु रामभद्राचार्य

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 6 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
PoK का विलय बस दो दिन दूर था: लखनऊ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बड़ा दावा
PoK का विलय बस दो दिन दूर था: लखनऊ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बड़ा दावा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में आध्यात्मिक गुरु ने दावा किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भारत में एकीकृत करने की क्षमता थी।

इस सप्ताह लखनऊ में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा ने एक नाटकीय मोड़ ले लिया, जब श्री राम कथा कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने दावा किया कि 2025 का 'ऑपरेशन सिंदूर' पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को वापस पाने से बस कुछ ही दिन दूर था। पहलगाम आतंकी हमलों के बाद शुरू किए गए इस ऑपरेशन ने सीमा पार नौ प्रमुख आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। जगद्गुरु के अनुसार, यदि सामरिक खिड़की (tactical window) 48 घंटे और खुली रहती, तो क्षेत्र का भू-राजनीतिक नक्शा हमेशा के लिए बदल सकता था।

एक रणनीतिक खुलासा

जगद्गुरु की टिप्पणियां काफी महत्वपूर्ण हैं, न केवल उनके कद के कारण, बल्कि इसलिए भी क्योंकि ये बातें तब कही गईं जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंच पर मौजूद थे। श्रोताओं को संबोधित करते हुए, आध्यात्मिक गुरु ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ रक्षा प्रतिष्ठान के सक्रिय रुख की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख किया और कहा कि जब जनरल ने 'गुरु दक्षिणा' देने की इच्छा जताई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से PoK को भारतीय संघ में फिर से शामिल करने का आग्रह किया था।

हालांकि यह रिपोर्ट कार्यक्रम के प्राथमिक स्रोत पर आधारित है, लेकिन इस मिशन का संदर्भ हिंदी मीडिया और राष्ट्रीय सुरक्षा के हलकों में एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। पर्यवेक्षक 'ऑपरेशन सिंदूर' को आतंकवाद के प्रति भारत की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति के एक प्रतीक के रूप में देखते हैं। जगद्गुरु ने देश की सैन्य शक्ति पर जोर देते हुए सीधे रक्षा मंत्री की ओर इशारा किया और रेखांकित किया कि एक क्षत्रिय के रूप में, राष्ट्र की रक्षा का दायित्व एक पवित्र जिम्मेदारी है, जिसे वर्तमान सरकार बखूबी निभा रही है।

2029 की ओर नजर

तत्काल सैन्य विमर्श से परे, यह कार्यक्रम राजनीतिक भविष्यवाणियों का मंच भी बना। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भविष्य के लिए एक साहसिक भविष्यवाणी की और दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 में सत्ता बरकरार रखेंगे और राजनाथ सिंह केंद्रीय रक्षा मंत्री के रूप में अपना कार्यकाल जारी रखेंगे। इस दावे ने उनकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति की टिप्पणी में राजनीतिक निरंतरता का एक नया आयाम जोड़ दिया।

शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण

कार्यक्रम में आध्यात्मिक गुरु ने सांस्कृतिक और शैक्षिक सुधारों पर भी जोर दिया। उन्होंने सरकार से जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने का औपचारिक आग्रह किया। इसके अलावा, उन्होंने रामचरितमानस को आधिकारिक तौर पर 'राष्ट्रीय ग्रंथ' घोषित करने की मांग करते हुए राष्ट्रीय विरासत पर बहस को फिर से हवा दी। उन्होंने तर्क दिया कि यह ग्रंथ भारत की सांस्कृतिक चेतना का आधार है।

अपने जवाब में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जगद्गुरु के साथ अपने तीन दशक पुराने जुड़ाव को याद किया। उनकी असाधारण याददाश्त और बौद्धिक क्षमता की सराहना करते हुए, सिंह ने आध्यात्मिक गुरु के योगदान को समाज के लिए प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बताया। कार्यक्रम के समापन पर, सैन्य आकांक्षाओं और सांस्कृतिक वकालत का यह संगम आध्यात्मिक प्रभाव और राष्ट्रीय नीति के उस जुड़ाव को दर्शाता है, जो भारत में वर्तमान विमर्श को आकार दे रहा है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
न्यूज़रूम

पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क पूरे भारत से सत्यापित, स्रोत-आधारित राजनीतिक समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।