भारत के 2047 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पीएम मोदी ने 'महिला-नेतृत्व विकास' पर जोर दिया
“महिलाओं की पूरी क्षमता को उजागर करने को प्राथमिकता देनी होगी” - नीति आयोग की बैठक में बोले प्रधानमंत्री!
नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत' के लिए एक सहयोगात्मक रोडमैप पर जोर दिया, जिसमें युवा सशक्तिकरण और वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता दी गई।
11 जून, 2026 को आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक भारत के 2047 के लक्ष्यों की दिशा तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। केंद्रीय मंत्रियों और तमिलनाडु के जोसेफ विजय सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति ने दिल्ली में सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को मजबूती दी। प्रधानमंत्री के लिए लक्ष्य स्पष्ट है: देश को एक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए राज्यों और केंद्र को अलग-अलग इकाइयों के रूप में नहीं, बल्कि विकास के एक एकल और एकजुट इंजन के रूप में काम करना होगा।
यह मूल लेख उन प्राथमिक स्रोतों पर आधारित है जहाँ प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता को भारत के लिए अपनी आर्थिक मजबूती साबित करने के अवसर के रूप में पेश किया। नीति आयोग को संवाद के मुख्य मंच के रूप में स्थापित करके, सरकार यह संकेत दे रही है कि संघीय बातचीत में अक्सर दिखने वाले मतभेदों को एक साझा और व्यावहारिक दृष्टिकोण से बदला जाना चाहिए।
मानव पूंजी की अनिवार्यता
चर्चा का एक बड़ा हिस्सा भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) पर केंद्रित था—यह एक ऐसा अवसर है जिसे सरकार चूकना नहीं चाहती। अब ध्यान शिक्षा और कौशल विकास के अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है। इस रणनीति में एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम बनाना शामिल है जो व्यावसायिक प्रशिक्षण को नौकरी बाजार की तत्काल जरूरतों के साथ जोड़ सके। शीर्ष स्तर से संदेश यह है कि भविष्य के लिए तैयार, कुशल युवा कार्यबल के बिना 'विकसित भारत' का सपना केवल एक कल्पना बनकर रह जाएगा।
आर्थिक खाके में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी चर्चा हुई। कई नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के लागू होने के साथ, सरकार MSMEs से अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाने का आग्रह कर रही है। तर्क सीधा है: यदि लघु उद्योग अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं, तो वे इन वैश्विक व्यापार समझौतों के स्वाभाविक लाभार्थी बन जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादन वैश्विक निर्यात में बदल जाएगा।
महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्राथमिकता
नीतिगत जोर में सबसे बड़ा बदलाव 'महिला-नेतृत्व विकास' पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि महिलाएं अब केवल सामाजिक कल्याण की लाभार्थी नहीं, बल्कि नवाचार की सक्रिय चालक हैं। कृषि से लेकर हाई-टेक स्टार्टअप और वैज्ञानिक अनुसंधान तक, प्रशासन ऐसी नीतियों को बढ़ावा दे रहा है जो इस कार्यबल की पूरी क्षमता को उजागर करें। स्पष्ट निर्देश यह है कि STEM और उद्यमिता में महिलाओं के लिए प्रवेश की बाधाओं को कम किया जाए, और उनकी भागीदारी को एक सामाजिक लक्ष्य के बजाय एक संरचनात्मक आवश्यकता के रूप में देखा जाए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यहाँ अंतर्निहित पैटर्न व्यापक, लोकलुभावन बयानबाजी से हटकर एक अधिक लक्षित, औद्योगिक-नीति संचालित एजेंडे की ओर संक्रमण है। राज्यों से यह मांग करके कि वे अपने स्थानीय शासन को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाएं, केंद्र प्रभावी रूप से एक प्रतिस्पर्धी संघीय वातावरण बना रहा है। यदि यह सफल होता है, तो यह दृष्टिकोण क्षेत्रीय शासन और वैश्विक बाजार मानकों के बीच की खाई को पाट सकता है। हालांकि, असली परीक्षा कार्यान्वयन की है—क्या नीति आयोग के बोर्डरूम में देखा गया सहयोगात्मक उत्साह जमीन पर ठोस नीतिगत तालमेल में बदल पाता है, विशेष रूप से उन राज्यों में जहां राजनीतिक जनादेश अलग हैं।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।