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पाकिस्तान की नौसैनिक महत्वाकांक्षा: नई 'हंगोर' क्लास पनडुब्बी कराची पहुंची

पाकिस्तान नेवी: चीन में बनी नई 'हंगोर' क्लास पनडुब्बी कराची पोर्ट पर पहुंची

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 15 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
पाकिस्तान की नौसैनिक महत्वाकांक्षा: नई 'हंगोर' क्लास पनडुब्बी कराची पहुंची
पाकिस्तान की नौसैनिक महत्वाकांक्षा: नई 'हंगोर' क्लास पनडुब्बी कराची पहुंची

चीन में निर्मित इस पनडुब्बी का आगमन एक लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

गुरुवार को कराची नेवल डॉकयार्ड में काफी हलचल देखी गई, जब पाकिस्तान नौसेना ने आधिकारिक तौर पर अपनी नई और अत्याधुनिक 'हंगोर' क्लास पनडुब्बी का स्वागत किया। पारंपरिक सलामी और पीएन Z-9EC हेलीकॉप्टरों के फ्लाई-पास्ट के साथ हुए इस इंडक्शन समारोह की अध्यक्षता कमांडर फ्लीट वाइस एडमिरल अब्दुल मुनीब ने की। पाकिस्तान नौसेना के लिए, यह केवल एक नया जहाज नहीं है, बल्कि उनकी फ्लीट आधुनिकीकरण रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह पाकिस्तान पनडुब्बी इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच 2015 में हुए एक महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय समझौते का परिणाम है। इस सौदे की शर्तों के तहत, चीन ने पाकिस्तान की समुद्री पहुंच को मजबूत करने के लिए आठ ऐसी पनडुब्बियां देने पर सहमति जताई थी। इसके निर्माण की रणनीति को दो हिस्सों में बांटा गया है: पहली चार पनडुब्बियां चीन में 'चाइना शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड' (CSIC) द्वारा बनाई जा रही हैं, जबकि शेष चार को तकनीक हस्तांतरण (technology transfer) समझौते के तहत कराची शिपयार्ड में असेंबल किया जा रहा है, ताकि घरेलू औद्योगिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

नाम में छिपा इतिहास

इस पनडुब्बी को 'हंगोर' नाम दिया गया है—जिसका बंगाली में अर्थ 'शार्क' होता है—और यह नाम काफी ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह 1971 से पहले के दौर की याद दिलाता है, जो विशेष रूप से उसी नाम की मूल फ्रांसीसी निर्मित डैफने-क्लास पनडुब्बी की विरासत को सम्मानित करता है, जिसने पाकिस्तान नौसेना में सेवा दी थी। इस नाम को पुनर्जीवित करके, नौसेना कमान अपनी आधुनिक फ्लीट को ऐतिहासिक प्रतीकों से जोड़ रही है, जबकि ये नए जहाज अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में तकनीकी क्षमता में एक बड़ी छलांग का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इन्वेंट्री में मौजूद पुरानी अटैक पनडुब्बियों के विपरीत, ये आधुनिक हंगोर-क्लास इकाइयां उन्नत स्टील्थ तकनीक से लैस हैं, जिससे इन्हें डिटेक्ट करना काफी मुश्किल हो जाता है। यह स्टील्थ क्षमता इस क्षेत्र के लिए एक 'गेम-चेंजर' है, जो अंडरसी वॉरफेयर (समुद्र के नीचे युद्ध) की गतिशीलता में अंतर को प्रभावी ढंग से कम करती है।

बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है

यह इंडक्शन चीन-पाकिस्तान रक्षा गलियारे के और गहरा होने का संकेत है। केवल खरीद से आगे बढ़कर तकनीक हस्तांतरण की ओर बढ़ने से, इस्लामाबाद एक स्थायी स्थानीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रयास कर रहा है। क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों के लिए, इन आठ पनडुब्बियों का शामिल होना—जिनमें से चार का निर्माण घरेलू धरती पर हो रहा है—अरब सागर में निरंतर उपस्थिति बनाए रखने की दीर्घकालिक योजना का संकेत देता है। स्टील्थ-सक्षम संपत्तियों की ओर यह बदलाव हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के दृष्टिकोण पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर करता है, क्योंकि ये प्लेटफॉर्म विशेष रूप से लंबी दूरी की गश्त और सामरिक श्रेष्ठता के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

हालांकि नौसैनिक आधुनिकीकरण जारी है, यह ध्यान देने योग्य है कि यह बीजिंग द्वारा समुद्री बुनियादी ढांचे और हार्डवेयर आपूर्ति के माध्यम से अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने के व्यापक चलन का हिस्सा है। पाकिस्तान के लिए लक्ष्य स्पष्ट है: एक आधुनिक, स्टील्थ-रेडी फ्लीट, जो कराची में स्थानीय असेंबली लाइनों के पूरी तरह चालू होने के साथ अधिक स्वतंत्रता के साथ काम कर सके।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।