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अब लंबी लाइनों से मुक्ति: गोरखपुर के निवासी घर बैठे बनवा सकेंगे आयुष्मान कार्ड

गोरखपुर में आयुष्मान कार्ड बनवाना हुआ बेहद आसान: पात्र लाभार्थी अब पूरी प्रक्रिया घर बैठे पूरी कर सकते हैं...

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 17 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
अब लंबी लाइनों से मुक्ति: गोरखपुर के निवासी घर बैठे बनवा सकेंगे आयुष्मान कार्ड
अब लंबी लाइनों से मुक्ति: गोरखपुर के निवासी घर बैठे बनवा सकेंगे आयुष्मान कार्ड

स्वास्थ्य विभाग की नई मोबाइल-आधारित प्रणाली ने दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी खत्म कर दी है, जिससे पात्र लाभार्थियों के लिए स्वास्थ्य कवरेज पाना और भी सरल हो गया है।

सालों से गोरखपुर में सरकारी दफ्तरों के बाहर एक आम नजारा दिखता था: आयुष्मान भारत कार्ड बनवाने के लिए घंटों, और कभी-कभी दिनों तक कतारों में खड़े परिवारों की लंबी भीड़। ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए इसका मतलब होता था एक दिन की दिहाड़ी का नुकसान और जटिल सरकारी प्रक्रियाओं से जूझना। अब यह सिलसिला आखिरकार खत्म हो रहा है। स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर डिजिटल-फर्स्ट मॉडल अपना लिया है, जिससे निवासी घर बैठे ही आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

डिजिटल बदलाव

इस बदलाव का मुख्य आधार 'आयुष्मान ऐप' है। सत्यापन प्रक्रिया को स्मार्टफोन इंटरफेस पर लाकर, स्वास्थ्य विभाग हजारों परिवारों के लिए पहुंच को डिजिटल बना रहा है। अब निवासियों को आवेदन शुरू करने के लिए जन सेवा केंद्रों या अस्पतालों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। इस बदलाव का उद्देश्य स्वास्थ्य ढांचे पर भौतिक बोझ को कम करना है, ताकि 'आयुष्मान भारत कार्ड अप्लाई' की प्रक्रिया बैंकिंग या यूटिलिटी ऐप के इस्तेमाल जितनी ही सामान्य हो जाए।

शुरुआत करना बहुत आसान है। ऐप डाउनलोड करने और बेनिफिशियरी मॉड्यूल चुनने के बाद, उपयोगकर्ता को अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी का उपयोग करके लॉग इन करना होता है। इसके बाद, ऐप आधार, राशन कार्ड विवरण या फैमिली आईडी का उपयोग करके रिकॉर्ड खोजने की सुविधा देता है। कार्ड जेनरेट करने की प्रक्रिया ई-केवाईसी (e-KYC) पर आधारित है, जिसे आधार ओटीपी या फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए पूरा किया जा सकता है। सत्यापन के बाद, कार्ड का डिजिटल वर्जन पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड के लिए तैयार हो जाता है।

जरूरी दस्तावेज

हालांकि प्रक्रिया अब ऑनलाइन है, लेकिन सटीकता बहुत महत्वपूर्ण है। डिजिटल सत्यापन को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए आवेदकों के पास अपना आधार कार्ड, राशन कार्ड और आय प्रमाण पत्र तैयार होना चाहिए। निर्माण श्रमिकों जैसी विशिष्ट श्रेणियों के लिए, संबंधित पंजीकरण प्रमाण पत्र भी आवश्यक है। चूंकि पूरी प्रणाली आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी पर निर्भर है, इसलिए अधिकारियों ने निवासियों को याद दिलाया है कि वे डाउनलोड करने का प्रयास करने से पहले अपने संपर्क विवरण को अपडेट जरूर कर लें।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: व्यापक परिप्रेक्ष्य

गोरखपुर में यह बदलाव प्रशासनिक सुव्यवस्थितकरण और डिजिटल पहुंच का एक बेहतरीन उदाहरण है। इन कार्डों के जारी होने की प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करके, राज्य कल्याणकारी सेवाओं के वितरण में आने वाली एक बड़ी बाधा को दूर कर रहा है। अक्सर, किसी सरकारी योजना की 'अंतिम छोर' तक पहुंच—यानी लाभार्थी के हाथों में वास्तविक दस्तावेज पहुंचाना—ही वह बिंदु है जहां सबसे ज्यादा देरी और खामियां होती हैं।

इसे मोबाइल इंटरफेस पर लाकर, प्रशासन न केवल समय बचा रहा है, बल्कि एक अधिक पारदर्शी और पेपरलेस व्यवस्था भी बना रहा है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह उन बिचौलियों पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है जो अक्सर लाभार्थियों की तकनीकी अज्ञानता का फायदा उठाते हैं। पीएम-जेएवाई (PM-JAY) जैसी महत्वपूर्ण योजना के लिए, सेल्फ-सर्विस की ओर यह कदम यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है कि स्वास्थ्य बीमा उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, और वह भी बिना किसी प्रशासनिक लालफीताशाही के।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।