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NEET परीक्षा संकट: बुलंदशहर के AAP नेता ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का किया समर्थन

NEET पेपर लीक मामला: बुलंदशहर के AAP नेता ने सोनम वांगचुक के अनशन का किया समर्थन

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 6 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
NEET परीक्षा संकट: बुलंदशहर के AAP नेता ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का किया समर्थन
NEET परीक्षा संकट: बुलंदशहर के AAP नेता ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का किया समर्थन

राष्ट्रीय राजधानी में NEET पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश के AAP नेताओं के शामिल होने से इसे स्थानीय राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है।

जंतर-मंतर पर विरोध की तपिश बढ़ती जा रही है और अब यह केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक आठ दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे शिक्षा प्रणाली में सुधार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सरकारी वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं। न्याय की यह मांग अब एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से मिले समर्थन ने नई ऊर्जा भर दी है।

AAP नेता विकास शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता हरि अंगिरा, धीरज पाल और संजय मित्तल के प्रतिनिधिमंडल के साथ इस सप्ताह विरोध स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता व्यक्त की। इस समूह की उपस्थिति एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है, क्योंकि क्षेत्रीय नेता अब NEET परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े राष्ट्रीय विमर्श के साथ जुड़ रहे हैं।

शीर्ष स्तर पर जवाबदेही की मांग

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए शर्मा ने तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने बार-बार हो रहे पेपर लीक के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। AAP प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि यह केवल एक परीक्षा का विरोध नहीं है, बल्कि वर्तमान प्रशासन द्वारा युवाओं के रोजगार और शैक्षणिक पारदर्शिता को संभालने के तरीके ने लाखों छात्रों को गहरे निराशा के दौर में धकेल दिया है।

हालांकि मुख्य मुद्दा NEET प्रक्रिया में गड़बड़ी है, लेकिन यह आंदोलन सरकार विरोधी व्यापक भावना का केंद्र बनता जा रहा है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि उनकी भागीदारी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह देश के भर्ती और परीक्षा ढांचे में विश्वास के संकट के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: व्यापक परिप्रेक्ष्य

वांगचुक जैसे नागरिक समाज के दिग्गजों और AAP जैसी राजनीतिक संस्थाओं के बीच बढ़ता यह गठबंधन सत्ताधारी खेमे के लिए एक बड़ी चुनौती है। जब उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य के स्थानीय नेता दिल्ली आकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं, तो यह मुद्दा 'छात्रों की समस्या' से बदलकर 'शासन की विफलता' का मुद्दा बन जाता है।

पैटर्न स्पष्ट है: NEET विवाद ने अलग-अलग समूहों को एकजुट होने का एक साझा मंच दे दिया है। जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर रहा है, केंद्र पर ठोस समाधान निकालने का दबाव बढ़ता जा रहा है। यदि सरकार इन मांगों को पूरा करने में विफल रहती है, तो यह आंदोलन भविष्य के चुनावी चक्रों से पहले असंतुष्ट आवाजों का एक बड़ा गठबंधन बन सकता है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।