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बिहार NDA में घमासान: MLC सीट की मांग को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और BJP के बीच तनातनी

'वादा निभाइए'... MLC सीट को लेकर दबाव बना रहे उपेंद्र कुशवाहा, BJP ने भी दिया जवाब

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 12 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
बिहार NDA: MLC सीट की मांग को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और BJP के बीच तनातनी
बिहार NDA: MLC सीट की मांग को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और BJP के बीच तनातनी

RLM प्रमुख अपने बेटे के लिए विधान परिषद की सीट की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि चुनाव से पहले BJP ने यह वादा किया था, जबकि BJP का दावा है कि समझौता पहले ही पूरा हो चुका है।

बिहार NDA के भीतर बनी नाजुक शांति एक बार फिर राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा सार्वजनिक रूप से BJP पर दबाव बना रहे हैं कि वह विधानसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे के समय किए गए वादे को पूरा करे। इस विवाद के केंद्र में उनके बेटे दीपक प्रकाश के लिए MLC सीट की मांग है, जो अब गठबंधन की मजबूती के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है।

विवाद की जड़

कुशवाहा की मांग एक पत्र पर टिकी है, जिसे चुनाव से पहले तत्कालीन प्रदेश BJP अध्यक्ष द्वारा जारी किया गया था। RLM के अनुसार, इस दस्तावेज में दो वादे थे: पहला, RLM छह विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और दूसरा, उसे BJP के कोटे से बिहार विधान परिषद की एक सीट दी जाएगी। विधानसभा सीटों का वादा तो पूरा हो गया, लेकिन MLC सीट का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है, जो इस गतिरोध की मुख्य वजह है।

BJP ने इस दावे को खारिज करते हुए समझौते की अपनी व्याख्या पेश की है। वरिष्ठ नेता दिलीप जायसवाल, जो शुरुआती बातचीत के दौरान कमान संभाले हुए थे, का तर्क है कि वह पत्र केवल विधानसभा चुनाव के सीट-बंटवारे तक ही सीमित था। उनके नजरिए से, वह समझौता पूरी तरह से लागू किया जा चुका है। जायसवाल ने यह भी याद दिलाया कि कुशवाहा को बाद में राज्यसभा भेजा गया था, जो यह दर्शाता है कि RLM प्रमुख के प्रति गठबंधन की जिम्मेदारियां पूरी हो चुकी हैं।

संवाद में कमी

निजी स्तर पर बातचीत को लेकर स्पष्टता न होने से स्थिति और जटिल हो गई है। जायसवाल ने खुद को इस विवाद से अलग करते हुए कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका कुशवाहा और BJP के केंद्रीय नेतृत्व के बीच बाद की चर्चाओं से पहले ही समाप्त हो गई थी। जायसवाल ने कहा, "उनके और आलाकमान के बीच क्या बात हुई, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है," जिससे समाधान की जिम्मेदारी अब पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर आ गई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: बड़ी तस्वीर

यह गतिरोध सिर्फ एक विधायी सीट का मामला नहीं है। यह उन चुनौतियों को उजागर करता है जिनका सामना BJP को गठबंधन में करना पड़ रहा है, जहां छोटे सहयोगी अक्सर महसूस करते हैं कि उनकी राजनीतिक अहमियत कम की जा रही है। कुशवाहा के लिए, अपने बेटे को MLC बनाना उनकी पार्टी की भविष्य की रणनीति और बिहार की राजनीति में प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, BJP के लिए ऐसी मांगों के आगे झुकना एक ऐसी मिसाल कायम कर सकता है, जिससे अन्य सहयोगी भी 'पुराने वादे' याद दिलाने लगें। इसका परिणाम यह तय करेगा कि क्या NDA का केंद्रीय नेतृत्व सहयोगियों को संतुष्ट करने को प्राथमिकता देगा या अपने पुराने समझौतों पर अडिग रहेगा।

चूंकि इस तनाव का मुख्य कारण अभी भी अनसुलझा है, इसलिए राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या RLM अपने तेवर और सख्त करेगी या BJP आलाकमान हस्तक्षेप कर किसी बड़े विवाद को रोकेगा। फिलहाल, आंतरिक दबाव बढ़ रहा है और विधान परिषद की सीट का वादा बिहार NDA के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।