राज्य का दर्जा बहाली के लिए जंतर-मंतर तक जाएगी NC, डिप्टी सीएम चौधरी ने केंद्र को दी चेतावनी
अगर राज्य का दर्जा बहाल नहीं हुआ तो जंतर-मंतर पर करेंगे विरोध प्रदर्शन: जे-के डिप्टी सीएम चौधरी

जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे को पूरा नहीं करती है, तो नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक माहौल केंद्र सरकार के साथ संभावित टकराव की ओर बढ़ रहा है। जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए, उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि यदि राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी जारी रहती है, तो सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) जंतर-मंतर पर औपचारिक विरोध प्रदर्शन शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि यह कदम पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला द्वारा तैयार किए गए उस रणनीतिक रोडमैप का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की शिकायतों को राष्ट्रीय मंच पर उठाना है।
स्वायत्तता की बढ़ती मांग
पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग हालिया राजनीतिक चर्चाओं में बार-बार उठती रही है। श्रीनगर के दचीगाम में आयोजित एक महत्वपूर्ण पार्टी बैठक के दौरान, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने औपचारिक रूप से एक प्रस्ताव अपनाया, जिसमें राज्य का दर्जा बहाल करने को अपना मुख्य राजनीतिक एजेंडा बताया गया। राजनीतिक गलियारों के नेताओं और सांसदों ने इसे कोई अनुग्रह की मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के शासन और स्थिरता के लिए एक लोकतांत्रिक अनिवार्यता बताया है।
विकास और आर्थिक चिंताएं
चौधरी के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश को वापस पूर्ण राज्य का दर्जा देने में देरी का स्थानीय आबादी पर ठोस और नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचे ने आर्थिक प्रगति को बाधित किया है, जिससे बेरोजगारी और बुनियादी सेवाओं—विशेष रूप से पानी और बिजली—जैसी समस्याएं अनसुलझी रह गई हैं। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र को उस स्तर पर फंडिंग नहीं मिल रही है जो एक पूर्ण राज्य के लिए आवश्यक है, जिससे जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
संयुक्त मोर्चे का आह्वान
नेशनल कॉन्फ्रेंस देश भर के विपक्षी दलों से समर्थन मांगकर अपने आंदोलन का दायरा बढ़ाने की योजना बना रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थानीय इकाई को चुनौती देते हुए, चौधरी ने उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी वास्तव में क्षेत्र के लोगों के साथ खड़ी है, तो उन्हें इस विरोध का समर्थन करना चाहिए; उन्होंने सुझाव दिया कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो जनता पार्टी की प्राथमिकताओं के बारे में खुद निष्कर्ष निकाल लेगी।
आगे की राह
हालांकि केंद्र ने पहले संकेत दिया था कि विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा, लेकिन बिना किसी कार्रवाई के बीते लगभग दो वर्षों ने NC को अपनी रणनीति तेज करने पर मजबूर कर दिया है। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में रखना चाहती है। जैसे-जैसे स्थिति विकसित हो रही है, राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि क्षेत्रीय नेतृत्व के इस बढ़ते दबाव पर नई दिल्ली क्या प्रतिक्रिया देती है।
नोट: "पनामा बनाम बोस्निया और हर्जेगोविना" जैसे असंबंधित विषयों से जुड़ी खबरें वर्तमान में अन्य क्षेत्रों में ट्रेंड कर रही हैं और इनका जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है।
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