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मुंबई मानसून: भारी बारिश से वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर थमी रफ्तार

वीडियो | मुंबई में जोरदार बारिश, वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर यातायात धीमा | बारिश | NDTV मराठी

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 24 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
मुंबई मानसून: भारी बारिश से वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर थमी रफ्तार
मुंबई मानसून: भारी बारिश से वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर थमी रफ्तार

सप्ताह की शुरुआत में ही यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि तेज बारिश ने शहर को भिगो दिया और वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई।

23 जून की सुबह मुंबई में हुई भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की परीक्षा ली। वेस्टर्न एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहन चालकों ने भारी देरी की सूचना दी, जहां जलभराव और कम दृश्यता के कारण गाड़ियां रेंगती नजर आईं। जैसे-जैसे शहर का हवामान (मौसम) बदल रहा है, बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक के पुराने दृश्य फिर से आम हो गए हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह अफरा-तफरी तुरंत वायरल हो गई। Twitter, Facebook और Reddit जैसे सोशल मीडिया चैनलों पर एक वीडियो तेजी से फैल रहा है, जिसमें जलभराव की भयावह स्थिति देखी जा सकती है। NDTV द्वारा सबसे पहले दिखाए गए इस फुटेज से पता चलता है कि मानसून के जोर पकड़ते ही मुंबई का इंफ्रास्ट्रक्चर किस तरह चरमरा जाता है। जो लोग वैकल्पिक रास्ते खोजने के लिए रूट मैप कॉपी कर रहे थे, उनके लिए उत्तर-दक्षिण के ज्यादातर रास्तों पर स्थिति निराशाजनक रही।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव

इस बारिश का असर केवल एक सड़क तक सीमित नहीं है। हर साल, लाखों यात्रियों की लाइफलाइन माना जाने वाला वेस्टर्न एक्सप्रेसवे एक बॉटलनेक (संकट बिंदु) बन जाता है, जिससे शहरी नियोजन पर बहस छिड़ जाती है। हालांकि एजेंसियां अक्सर मानसून के लिए तैयार होने का दावा करती हैं, लेकिन सीजन की पहली बड़ी बारिश के दौरान जमीनी हकीकत यह बताती है कि शहर की जल निकासी क्षमता अक्सर भारी वर्षा के सामने घुटने टेक देती है।

यह क्यों मायने रखता है

वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर बार-बार लगने वाला जाम सिर्फ एक लॉजिस्टिकल समस्या नहीं है; यह शहर की गिरती सहनशक्ति का पैमाना है। जैसे-जैसे मुंबई का विस्तार हो रहा है, एक ही मुख्य सड़क पर निर्भरता एक बड़ी कमजोरी बन गई है। जब भारी बारिश पीक आवर्स के दौरान होती है, तो मैन-आवर और ईंधन की बर्बादी का आर्थिक नुकसान बहुत अधिक होता है। शहरी योजनाकारों के लिए चुनौती साफ है: शहर के विकास और अनिश्चित होते मौसम को संभालने के लिए अब केवल मरम्मत का काम काफी नहीं है।

यातायात की इन समस्याओं के अलावा, शहर हाई अलर्ट पर है। चूंकि नगर निगम अधिकारी मौसम के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए निवासी अपनी यात्रा की योजना बनाने के लिए रियल-टाइम सोशल मीडिया अपडेट्स पर निर्भर हैं। चाहे वह WhatsApp पर आया कोई अलर्ट हो या कोई न्यूज क्लिप, डिजिटल कनेक्टिविटी अब रेनकोट और छतरियों की तरह ही जरूरी हो गई है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।