पुलिस की सख्ती: तमिलनाडु में 'गुंडा एक्ट' के तहत कई गिरफ्तारियां
5 लोग गुंडा एक्ट के तहत जेल भेजे गए
तंजावुर से लेकर थूथुकुडी तक, प्रशासन हत्या, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध में शामिल आदतन अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए सख्त 'गुंडा एक्ट' का उपयोग कर रहा है।
राज्य की कानून-व्यवस्था मशीनरी ने आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने के लिए गुंडा एक्ट के इस्तेमाल को तेज कर दिया है। हाल के हफ्तों में, कई जिलों की पुलिस ने आदतन अपराधियों को लंबी अवधि के लिए हिरासत में लेने की कार्रवाई की है, जो यह दर्शाता है कि सार्वजनिक व्यवस्था को बार-बार खतरे में डालने वाले व्यक्तियों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जा रही है। निवारक हिरासत में यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब केवल जमानत प्रक्रियाओं पर निर्भर रहने के बजाय आदतन अपराधियों को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखने पर जोर दे रहा है।
लक्षित हिरासत का पैटर्न
यह कार्रवाई अपराध की कई श्रेणियों में फैली हुई है। तंजावुर में, कुडावासल में एक ईंट भट्ठा सुपरवाइजर की हत्या में शामिल पांच लोगों को हाल ही में गुंडा एक्ट के तहत त्रिची सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इसी तरह की कार्रवाई तिरुपुर में देखी गई, जहां शहर की पुलिस और जिला अधिकारियों ने हत्या और हत्या के प्रयास के अलग-अलग मामलों में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। ये वे व्यक्ति थे जिन्हें पहले जमानत मिल चुकी थी, लेकिन अधिकारियों द्वारा यह तय किए जाने के बाद कि उनकी मौजूदगी सामुदायिक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है, उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।
नशीले पदार्थों के खिलाफ प्रवर्तन में भी इस कठोर दृष्टिकोण को अपनाया गया है। थूथुकुडी में, हाल ही में गांजा तस्करी के मामलों में पकड़े गए पांच व्यक्तियों को जिला कलेक्टर के आदेश के बाद निवारक हिरासत में रखा गया है। इसके साथ ही इस साल स्थानीय स्तर पर ऐसी हिरासत की संख्या 81 हो गई है, जो यह रेखांकित करती है कि प्रशासन क्षेत्र में नशीले पदार्थों के वितरण को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
साइबर अपराध के मोर्चे पर
निवारक हिरासत का दायरा अब केवल शारीरिक हिंसा या पारंपरिक अपराधों तक सीमित नहीं है। राज्य के साइबर-क्राइम डिवीजन परिष्कृत ऑनलाइन घोटालों से निपटने के लिए तेजी से गुंडा एक्ट का उपयोग कर रहे हैं। dinamani की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक 48 साइबर अपराधियों को इस कानून के तहत हिरासत में लिया गया है—जो 2024 में दर्ज 35 मामलों की तुलना में काफी अधिक है। इन जांचों का दायरा व्यापक है, जिसमें घरेलू संदिग्धों के साथ-साथ अन्य राज्यों या विदेशी क्षेत्रों से काम करने वाले व्यक्ति भी शामिल हैं, जो अक्सर जटिल धोखाधड़ी योजनाओं से जुड़े होते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: बड़ी तस्वीर
गुंडा एक्ट का बार-बार उपयोग आपराधिक न्याय प्रणाली के 'रिवॉल्विंग डोर' (अपराधियों का बार-बार छूटकर बाहर आना) प्रभाव को कम करने की राज्य की व्यापक रणनीति को दर्शाता है। हत्या, नशीली दवाओं की तस्करी या साइबर धोखाधड़ी जैसे मामलों में आदतन अपराधियों को सार्वजनिक शांति के लिए खतरा मानकर, अधिकारी अपराध के चक्र को बढ़ने से पहले ही रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि इसका प्राथमिक उद्देश्य तत्काल निवारण है, लेकिन यह प्रवृत्ति कानून प्रवर्तन के लिए एक चुनौती भी पेश करती है: त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई और ऐसी हिरासत को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए आवश्यक कठोर साक्ष्य मानकों के बीच संतुलन बनाए रखना। जैसे-जैसे राज्य इन पैटर्न की निगरानी कर रहा है, इस सட்டம் (कानून) पर निर्भरता यह बताती है कि स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक हिरासत पुलिस के लिए एक प्रमुख उपकरण बनी रहेगी। maalaimalar जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन घटनाक्रमों पर नजर रखने वाले जनता और कानूनी पर्यवेक्षकों के लिए, इन रिपोर्टों में बढ़ोतरी राज्य की वर्तमान प्रशासनिक प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।