ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले रद्द करने से बाजारों में तेजी: वैश्विक निवेशकों ने ली राहत की सांस
आज का शेयर बाजार: ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले रद्द करने के बाद Dow और Nasdaq में उछाल — लाइव अपडेट्स
शुक्रवार को वैश्विक इक्विटी बाजारों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक ड्रोन गिराए जाने के जवाब में नियोजित सैन्य कार्रवाई को रद्द कर दिया, जिससे मध्य पूर्व में पूर्ण युद्ध का डर कम हो गया।
वॉल स्ट्रीट के ट्रेडर्स ने आज सुबह जब अपने डेस्क संभाले, तो उनके सामने जोखिमों की तस्वीर चौबीस घंटे पहले की तुलना में बिल्कुल अलग थी। तनावपूर्ण हफ़्ते के बाद, जिसने तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर दी थी और निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर धकेल दिया था, अब माहौल पूरी तरह बदल गया है। अमेरिकी निगरानी ड्रोन को नष्ट किए जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित हमले रद्द करने की खबरों ने वित्तीय जगत को तुरंत राहत दी है।
वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया निर्णायक रही। जैसे ही आज का शेयर बाजार संभल रहा है, तनाव कम होने की खबर के बाद Dow और Nasdaq दोनों में तेजी देखी गई। हालांकि US Iran news वैश्विक सुर्खियों में बनी हुई है, लेकिन सीधे सैन्य टकराव का तात्कालिक डर—जो निश्चित रूप से कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर देता—अब एक सतर्क आशावाद में बदल गया है।
बाजार की त्वरित प्रतिक्रिया
प्रमुख वित्तीय केंद्र इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। इसका तत्काल असर कमोडिटी बाजारों में दिखा, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने का खतरा टलने के बाद तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई। जब प्रेस ने राष्ट्रपति के जवाबी हमले रद्द करने के फैसले की रिपोर्टिंग शुरू की, तो राहत साफ महसूस की जा सकती थी।
सूचकांक इस बदले हुए मिजाज को दर्शा रहे हैं। अनिश्चितता छंटने के साथ ही Dow और Nasdaq में आई तेजी यह स्पष्ट करती है कि निवेशक युद्ध के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। कई वित्तीय आउटलेट्स इन गतिविधियों को अपने लाइव अपडेट्स का हिस्सा बना रहे हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि सप्ताह की शुरुआत में देखी गई अस्थिरता अब कम हो रही है।
बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है
दिल्ली से इस घटना को देखने वालों के लिए, इसका महत्व अमेरिकी शेयर बाजार के आंकड़ों से कहीं अधिक है। भारत अभी भी खाड़ी देशों से ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर है; क्षेत्र में कोई भी तनाव हमारे आयात बिल और विस्तार से कहें तो रुपये की स्थिरता के लिए सीधा खतरा है।
हम जो देख रहे हैं वह "भू-राजनीतिक अस्थिरता" का एक ऐसा पैटर्न है जो वैश्विक बाजारों के लिए नया सामान्य बन गया है। निवेशक अब राष्ट्रपति के ट्वीट्स और अंतिम समय में होने वाले नीतिगत बदलावों के आधार पर व्यापार करने के आदी हो रहे हैं। हालांकि बाजार इन हमलों के रद्द होने का जश्न मना रहे हैं, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच अंतर्निहित तनाव अभी भी अनसुलझा है। आज की बढ़त बाजार की अचानक युद्ध के प्रति अरुचि का प्रमाण है, लेकिन यह यह भी उजागर करती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दांव-पेचों के बीच वैश्विक आर्थिक सुधार कितना नाजुक बना हुआ है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।