मऊ में स्थानीय विवाद: PMAY-G पात्रता बैठकों में विसंगतियों को लेकर हंगामा
जगदीपुर एवं पहसा में खुली बैठक कर आवास के पात्रों की हुई जांच
जगदीपुर और पहसा में आयोजित ग्राम पंचायत बैठकें उस समय हंगामेदार हो गईं जब ग्रामीणों ने PMAY-G सर्वे की नवीनतम सूची पर सवाल उठाए और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) 'आवास' सर्वे 2024 के लिए स्थायी पात्रता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया इस सप्ताह मऊ जिले में विवादों में घिर गई। पंचायत अधिकारी रानी यादव की अध्यक्षता में जगदीपुर और पहसा ग्राम पंचायतों में आयोजित अनिवार्य खुली बैठकों के दौरान, स्थानीय निवासियों ने आधिकारिक डेटा को चुनौती दी और जमीनी हकीकत व प्रशासनिक सर्वे रिकॉर्ड के बीच भारी अंतर को उजागर किया।
जगदीपुर में, अधिकारियों ने 93 संभावित लाभार्थियों की सूची पढ़कर सुनाई। हालांकि, यह सत्र जल्द ही विवादों में आ गया जब हवंती शर्मा, ज्ञान्ती देवी, उषा देवी, गीता और मीरा देवी सहित कई महिलाएं विरोध करने के लिए आगे आईं। उन्होंने दावा किया कि आवास सहायता के लिए आवश्यक मानदंडों को पूरा करने के बावजूद, उनके नाम रिकॉर्ड से गायब थे। आधिकारिक प्रतिक्रिया सतर्क रही, लेकिन प्रशासन ने आश्वासन दिया कि सरकार के तय मानकों को पूरा करने वाले किसी भी परिवार को अंतिम सूची में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
पहसा में असंतोष
पहसा की स्थिति और भी तनावपूर्ण थी। प्रशासनिक रिकॉर्ड में पिछले 98 के सर्वे में से केवल 66 नाम ही दिखाए गए, जिससे 32 नाम गायब हो गए। ग्रामीणों के लिए, यह केवल एक लिपिकीय त्रुटि नहीं थी; यह सीधे तौर पर उनके आवास के सपनों पर प्रहार था। सरकार द्वारा अनिवार्य इन खुली बैठकों का उद्देश्य प्राथमिक सत्यापन करना है—ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 'आवास' सूची स्थायी होने से पहले सटीक और समावेशी हो।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
ये घटनाएं ग्रामीण भारत में सामाजिक कल्याण योजनाओं के डिजिटलीकरण की निरंतर चुनौती को उजागर करती हैं। हालांकि 'आवास प्लस' डिजिटल सर्वे मॉडल का उद्देश्य भ्रष्टाचार और मानवीय पक्षपात को कम करना है, लेकिन मऊ में देखी गई स्थिति यह बताती है कि सत्यापन के 'अंतिम चरण' में अभी भी संचार की भारी कमी है। जब प्रशासनिक सूचियां समुदाय के वास्तविक अनुभवों से मेल नहीं खातीं, तो ये 'खुली बैठकें' एक महत्वपूर्ण सुरक्षा वाल्व का काम करती हैं। यहीं पर प्रशासन को डेटा-आधारित पात्रता मानदंडों और ग्रामीणों की व्यावहारिक शिकायतों के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि योजना सही लाभार्थियों तक पहुंच सके।
हिन्दुस्तान टीम की रिपोर्ट के अनुसार, ये सत्र राष्ट्रीय 'प्राथमिक' सर्वे सत्यापन प्रक्रिया के महत्वपूर्ण अंग हैं। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वे निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं, लेकिन राज्य की ड्राफ्ट सूची और लोगों की सूची के बीच का अंतर यह बताता है कि 2024 की आवास योजना को निष्पक्ष बनाने के लिए सावधानीपूर्वक मैन्युअल मिलान की आवश्यकता है, ताकि सबसे जरूरतमंद परिवार पीछे न छूट जाएं।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।