अरूप बिस्वास को कानूनी झटका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'मेसी GOAT टूर' विवाद में तत्काल सुनवाई से किया इनकार
मेसी GOAT टूर विवाद: पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास की तत्काल सुनवाई की याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की

पूर्व राज्य मंत्री की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि कोर्ट ने विवादित फुटबॉल इवेंट से जुड़ी एफआईआर के खिलाफ उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
कोलकाता में हुए चर्चित 'मेसी GOAT टूर' का विवाद पूर्व राज्य मंत्री अरूप बिस्वास का पीछा नहीं छोड़ रहा है। सोमवार को उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट में एक बड़ा कानूनी झटका लगा। कथित आपराधिक धमकी के मामले में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए पूर्व मंत्री की कानूनी टीम ने गिरफ्तारी के डर का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच ने इस मांग को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को सामान्य कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया।
पूर्व मंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने तर्क दिया कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने सवाल उठाया कि छह महीने पहले हुए एक इवेंट को लेकर 30 मई को उनके मुवक्किल के खिलाफ अचानक एफआईआर क्यों दर्ज की गई। दत्ता ने मंत्री के भाई स्वरूप बिस्वास की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला तत्काल हस्तक्षेप की मांग करता है। दत्ता ने कोर्ट से कहा, "यह मामला अत्यंत जरूरी है," क्योंकि पूर्व मंत्री को साल्ट लेक पुलिस स्टेशन के सामने पेश होना था।
हालांकि, कोर्ट अपने रुख पर अडिग रहा। बेंच ने इसे असाधारण आपातकालीन मामला मानने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाओं को प्राथमिकता देने से न्यायिक प्रक्रिया बाधित होगी। गिरफ्तारी से बचने के लिए जल्द सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सामान्य कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी और कहा कि यदि उन्हें गिरफ्तारी का डर है, तो वे अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बड़ी तस्वीर
यह मामला पश्चिम बंगाल में हाई-प्रोफाइल स्पोर्ट्स इवेंट मैनेजमेंट और स्थानीय राजनीति के बीच के जटिल संबंधों को उजागर करता है। फुटबॉल की दुनिया के दिग्गजों को शहर में लाने का जो प्रयास एक भव्य आयोजन के रूप में शुरू हुआ था, वह अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। इस मामले में सुनवाई को प्राथमिकता न देकर, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राजनीतिक दबाव के बजाय प्रक्रियात्मक कठोरता को प्राथमिकता देगा। पूर्व मंत्री के लिए अब रास्ता साफ है: उन्हें सुरक्षा पाने के लिए सामान्य न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा, जिससे यह विवाद आने वाले हफ्तों तक सुर्खियों में बना रहेगा।
इस मामले की जड़ें दिसंबर में साल्ट लेक स्टेडियम में हुए उस इवेंट में हैं, जिसे एक भव्य आयोजन के रूप में पेश किया गया था, लेकिन अब यह लगातार कानूनी विवादों का केंद्र बन गया है। जैसे-जैसे यह कानूनी खींचतान आगे बढ़ रही है, यह घटना याद दिलाती है कि कैसे सार्वजनिक कार्यक्रम विवादों में घिरने पर आयोजकों से लेकर बड़े अधिकारियों तक के लिए मुसीबत बन सकते हैं। कोर्ट द्वारा सामान्य कानूनी प्रक्रिया पर जोर देने के बाद, अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या पूर्व मंत्री कानूनी सुरक्षा हासिल कर पाएंगे या पुलिस अपनी जांच के अनुसार आगे बढ़ेगी।
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