एक खौफनाक ट्रेंड: कर्नाटक में गैस गीजर क्यों बन रहे हैं 'साइलेंट किलर'?
वीकेंड ट्रिप बनी मातम: कोडगु में गैस गीजर से गैस रिसाव के संदेह में बेंगलुरु की महिला कर्मचारी की मौत

कोडगु की एक वीकेंड ट्रिप उस समय मातम में बदल गई, जब बेंगलुरु की एक 27 वर्षीय प्रोफेशनल की संदिग्ध गैस गीजर रिसाव के कारण मौत हो गई। यह घटना घरों में छिपे एक घातक खतरे को उजागर करती है।
बेंगलुरु में काम करने वाली 27 वर्षीय विनूथा के लिए यह वीकेंड एक सुकून भरा ब्रेक होने वाला था। लेकिन कोडगु के कल्कान्डुरू इलाके के एक होमस्टे में उनकी यह यात्रा पुलिस जांच पर जाकर खत्म हुई। विनूथा अपने 14 सहकर्मियों के साथ घूमने गई थीं। रविवार को जब वह काफी देर तक बाथरूम से बाहर नहीं आईं, तो उनके साथियों ने उन्हें चेक किया और उन्हें बेहोशी की हालत में पाया। नजदीकी अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, लेकिन शुरुआती जांच में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के रिसाव का संकेत मिल रहा है। होमस्टे का बाथरूम छोटा था और वहां वेंटिलेशन की कमी थी, जिसे जांचकर्ता इस त्रासदी का मुख्य कारण मान रहे हैं। जब गैस गीजर में ईंधन का अधूरा दहन होता है, तो कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है—यह एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जो बंद कमरे में कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है।
ऐसी मौतों का बढ़ता पैटर्न
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। इन हीटिंग सिस्टम से जुड़ी मौतें चिंताजनक हैं। कर्नाटक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से अब तक राज्य भर में गैस गीजर रिसाव के कारण 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से कम से कम 50 मौतें बेंगलुरु और उसके आसपास दर्ज की गई हैं।
इन आंकड़ों के पीछे का मानवीय दर्द बहुत गहरा है। फरवरी में, बेंगलुरु के राजू की भी ऐसी ही परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसके गम में उनकी पत्नी ने उसी दिन खुदकुशी कर ली थी। अन्य हालिया त्रासदियों में 26 वर्षीय चांदनी और उनकी चार साल की बेटी की मौत, और 2021 में कोडगु के ही एक होमस्टे में एमबीए ग्रेजुएट की मौत शामिल है। इन मामलों की आवृत्ति बताती है कि सिस्टम की लापरवाही या जन जागरूकता की कमी के कारण यह घरेलू खतरा लगातार बना हुआ है।
यह मामला गंभीर क्यों है?
इन मौतों का बार-बार होना घर के रखरखाव और इंडस्ट्री रेगुलेशन में बड़ी खामियों को उजागर करता है। कई गैस गीजर बिना उचित वेंटिलेशन वाले छोटे बाथरूम में लगाए जाते हैं, जो एक बुनियादी सुविधा को 'गैस चैंबर' में बदल देते हैं। जहां उपभोक्ता अक्सर लागत और जगह बचाने को प्राथमिकता देते हैं, वहीं रेंटल प्रॉपर्टीज और होमस्टे में सुरक्षा ऑडिट की कमी निवासियों के लिए खतरनाक माहौल बनाती है।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए ये घटनाएं एक चेतावनी हैं। पहले भी ऐसी मौतों के बाद होमस्टे पर भारी जुर्माना लगाया गया है, जो संपत्ति मालिकों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। जब तक वेंटिलेशन मानकों और गैस उपकरणों की नियमित सुरक्षा जांच के लिए अनिवार्य नियम नहीं बनते, तब तक यह खतरा बना रहेगा।
सुरक्षा के उपाय
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का बार-बार कहना है कि इन सिस्टम्स को लगाने के लिए खास प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। यदि आप गैस गीजर का उपयोग करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि यूनिट बाथरूम के बाहर या ऐसी जगह लगी हो जहां हवा का प्रवाह बना रहे। गैस गीजर को लंबे समय तक चालू न छोड़ें। यदि नहाते समय आपको कोई अजीब गंध आए या चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत उस जगह से बाहर निकलें और गैस सप्लाई बंद कर दें।
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