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कोलकाता अग्निकांड: सरकारी इमारत में आग से 4,000 EVM जलकर खाक, साजिश की आशंका

कोलकाता की सरकारी बिल्डिंग में आग, 4 हजार EVM जलीं: मंत्री बोले- 10 सीटों पर इस्तेमाल हुईं, साजिश की आशंका

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 15 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
कोलकाता अग्निकांड: सरकारी इमारत में आग से 4,000 EVM नष्ट; साजिश की आशंका
कोलकाता अग्निकांड: सरकारी इमारत में आग से 4,000 EVM नष्ट; साजिश की आशंका

दक्षिण 24 परगना के एक सरकारी कार्यालय में लगी भीषण आग ने हजारों वोटिंग मशीनों को राख में बदल दिया है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता को लेकर तीखा राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है।

कोलकाता में एक सरकारी इमारत का जला हुआ ढांचा भारत के अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य में नया विवाद बन गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान, एक विनाशकारी आग ने उस इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें दक्षिण 24 परगना जिला परिषद सहित राज्य के कई विभाग स्थित थे। इस आग में लगभग 4,000 EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) यूनिट्स जलकर नष्ट हो गईं। ये मशीनें केवल बेकार हार्डवेयर नहीं थीं; ये वही उपकरण थे जिनका उपयोग इस साल के राज्य चुनावों के दौरान जाधवपुर, बेहला और डायमंड हार्बर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों सहित 10 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया था।

एक संदिग्ध घटनाक्रम

आग के फैलने के तरीके ने जांचकर्ताओं और राज्य के अधिकारियों के बीच संदेह पैदा कर दिया है। अग्निशमन और आपदा प्रबंधन मंत्री कौशिक चौधरी ने एक बड़ी विसंगति की ओर इशारा किया: आग चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल को छोड़कर सीधे निचली मंजिलों से सातवीं से दसवीं मंजिल तक पहुंच गई। चौधरी ने टिप्पणी की, "यह आग सामान्य नहीं लग रही है," और उन्होंने किसी सोची-समझी साजिश से इनकार नहीं किया। एक SIT का गठन किया गया है और अलीपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। फॉरेंसिक टीमें यह पता लगाने के लिए घटनास्थल की जांच कर रही हैं कि क्या यह शॉर्ट-सर्किट की त्रासदी थी या सबूतों को नष्ट करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास।

इन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यूनिट्स के नुकसान ने इस घटना को तुरंत राजनीतिक रंग दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सोशल मीडिया पर कहा है कि उन्होंने पहले ही अदालतों का दरवाजा खटखटाया था ताकि इन विशिष्ट मशीनों और उनके CCTV फुटेज की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। घटना के समय और सुरक्षा चूक की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए, पार्टी चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है। वहीं, AAP और कांग्रेस ने भी इस मांग में सुर मिलाते हुए राज्य सरकार और केंद्रीय अधिकारियों से पारदर्शिता की मांग की है कि आखिर एक सुरक्षित सरकारी सुविधा में इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है।

BJP और राज्य में तनाव

जहां विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी से बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और BJP नेता राकेश सिंह, दोनों ने ही साजिश की आशंका जताई है, हालांकि किसी ने भी इन दावों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं दिए हैं। BJP का कहना है कि इन मशीनों का नष्ट होना एक "नियोजित घटना" है, जिसने इस जांच में जटिलता की एक और परत जोड़ दी है, जो पहले से ही जनता की कड़ी निगरानी में है। फिलहाल, राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा इन यूनिट्स के "नष्ट" होने और चुनाव के बाद के ऑडिट ट्रेल के लिए उनके नुकसान के मायने पर केंद्रित है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

तत्काल राजनीतिक बयानबाजी से परे, यह आग लोकतांत्रिक बुनियादी ढांचे में जनता के भरोसे की नींव पर प्रहार करती है। जब राष्ट्रीय या राज्य चुनावों में इस्तेमाल होने वाला हार्डवेयर रहस्यमय परिस्थितियों में नष्ट हो जाता है, तो यह मतदान प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर चल रही पुरानी बहसों को फिर से हवा देता है। चाहे कारण आपराधिक हो या दुर्घटना, यह घटना चुनाव सामग्री के भौतिक भंडारण में एक गंभीर खामी को उजागर करती है। चुनाव आयोग के लिए अब चुनौती इस मूल संकट के परिणामों को संभालने और यह सुनिश्चित करने की है कि चुनावी डेटा की अखंडता—जिसे सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जाना चाहिए—संदेह के घेरे में न आए।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।