Politicalpedia
बिज़नेस

IT शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव से थमी सेंसेक्स की पांच दिन की तेजी

सेंसेक्स 600 अंक से अधिक टूटा, आईटी शेयरों में गिरावट का असर

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 22 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
आईटी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव से थमी सेंसेक्स की पांच दिन की तेजी
आईटी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव से थमी सेंसेक्स की पांच दिन की तेजी

शुक्रवार, 19 जून को भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में नरमी देखी गई। एक्सेंचर के नेतृत्व में वैश्विक टेक शेयरों में गिरावट और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में आई रुकावट के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

दलाल स्ट्रीट पर हफ्ते भर से जारी तेजी पर शुक्रवार को ब्रेक लग गया। पांच दिनों की शानदार दौड़ में सेंसेक्स 3,500 अंक से अधिक चढ़ा था, लेकिन अंततः सूचकांक ने हार मान ली और 607.08 अंक गिरकर 76,802.90 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 154.90 अंक फिसलकर 24,013.10 पर आ गया। हालांकि जो ट्रेडर्स gift nifty live today पर नजर रख रहे थे, उन्हें अस्थिरता की उम्मीद थी, लेकिन इंट्राडे में आई 940 अंकों की भारी गिरावट ने कई लोगों को चौंका दिया।

इस गिरावट का मुख्य कारण आईटी सेक्टर रहा, जिसे एक्सेंचर द्वारा पूरे साल के रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस में कटौती के बाद सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। इस चेतावनी ने भारतीय टेक शेयरों में खलबली मचा दी, जिसमें इंफोसिस 6.69% और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 3.53% तक टूट गए। HCL टेक और टेक महिंद्रा भी लाल निशान में बंद हुए, जिससे BSE आईटी इंडेक्स 3.57% नीचे आ गया।

भू-राजनीतिक चिंताएं

कॉर्पोरेट नतीजों की निराशा के अलावा, व्यापक स्तर पर अनिश्चितता ने भी बाजार पर दबाव बनाया। अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया को उस समय झटका लगा जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने ईरानी वार्ताकारों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा के लिए स्विट्जरलैंड की अपनी यात्रा स्थगित कर दी। व्हाइट हाउस ने इसके लिए लॉजिस्टिक कारणों का हवाला दिया, लेकिन इस देरी ने—ईरान समझौते को लेकर अमेरिका और उसके कुछ सहयोगियों के बीच बढ़ती दरार के साथ मिलकर—बाजार की धारणा को बिगाड़ दिया, जिससे निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

रिलायंस का फैक्टर

बाजार की व्यापक निराशा के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज की कॉर्पोरेट हलचल ने थोड़ी राहत दी। कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक में मुकेश अंबानी ने पुष्टि की कि जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने को मंजूरी दे दी है। कंपनी SEBI के पास 27 करोड़ इक्विटी शेयरों तक के फ्रेश इश्यू के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की योजना बना रही है, जो डिजिटल और दूरसंचार क्षेत्र में एक बड़े लिक्विडिटी इवेंट का संकेत है।

यह क्यों मायने रखता है

यह सुधार बाजार में 'अफवाह पर खरीदो, खबर पर बेचो' (buy the rumor, sell the fact) का एक क्लासिक उदाहरण है। पांच दिनों में सूचकांक के 4.84% चढ़ने के बाद, निवेशक पहले से ही मुनाफे में थे, जिससे वे किसी भी नकारात्मक संकेत के प्रति अति-संवेदनशील हो गए थे। एक्सेंचर की चेतावनी मुनाफावसूली का सही बहाना बन गई। आगे देखते हुए, अब ध्यान इस पर होगा कि आईटी कंपनियां वैश्विक खर्च के कठिन माहौल से कैसे निपटती हैं। हालांकि घरेलू स्तर पर लंबी अवधि की विकास गाथा बरकरार है, लेकिन बाजार स्पष्ट रूप से ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल में उम्मीदों पर खरा न उतरने वाली कंपनियों को दंडित किया जाएगा।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।