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योग दिवस की पूर्व संध्या पर कोलकाता में दिखा ड्रोन का अद्भुत नजारा, हुगली का आसमान हुआ रोशन

तस्वीरों में: कोलकाता में योग दिवस की पूर्व संध्या पर ड्रोन शो का रहा जलवा

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 21 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
योग दिवस की पूर्व संध्या पर कोलकाता में हुगली नदी के ऊपर ड्रोन शो का नजारा
योग दिवस की पूर्व संध्या पर कोलकाता में हुगली नदी के ऊपर ड्रोन शो का नजारा

हुगली के तट पर तकनीक के साथ हुए इस आयोजन ने शहर के प्रतिष्ठित रिवरफ्रंट को रोशनी और गति के एक कैनवास में बदल दिया।

इस रविवार हुगली नदी के किनारे उमस भरी शाम में केवल हवा ही नहीं, बल्कि कुछ और भी खास था। जैसे-जैसे शहर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए तैयार हो रहा था, प्रिंसिप घाट और मिलेनियम पार्क का आसमान एक समन्वित ड्रोन और लेजर शो का मंच बन गया। यह इस बात का संकेत था कि कोलकाता अब सार्वजनिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों को देखने का अपना नजरिया बदल रहा है। बीते वर्षों के पारंपरिक और स्थिर आयोजनों से हटकर, राज्य की विरासत स्थलों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की कोशिश साफ तौर पर दिखाई दे रही थी।

हजारों लोग घाटों पर जमा थे, जिनकी नजरें आसमान की ओर टिकी थीं। ड्रोन के झुंड ने अंधेरे आसमान की पृष्ठभूमि में जटिल ज्यामितीय पैटर्न और योग की आकृतियां बनाईं। यह दृश्य 'योग संगम' आंदोलन में बढ़ती रुचि से प्रेरित था, जो प्राचीन कल्याणकारी प्रथाओं और राज्य के शहरी योजनाकारों की डिजिटल-फर्स्ट महत्वाकांक्षाओं के बीच एक सेतु का काम कर रहा था।

सार्वजनिक जुड़ाव के लिए एक नई शैली

यह केवल दिखावे की बात नहीं है। हुगली के ऊपर ड्रोन को नाचते हुए देखकर यह स्पष्ट है कि कोलकाता राष्ट्रीय मील के पत्थर वाले आयोजनों को 'इवेंट' का रूप देकर युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। राज्य के नेतृत्व वाले इस जश्न में हाई-एंड तकनीक का एकीकरण एक सोची-समझी रणनीति की ओर इशारा करता है: 'टेलीग्राफ' और अन्य क्षेत्रीय मंचों का उपयोग करके पश्चिम बंगाल की एक अधिक आधुनिक और जीवंत छवि को देश के सामने पेश करना।

इसकी व्यवस्था काफी सटीक थी। मिलेनियम पार्क में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ड्रोन शो को जोड़कर, प्रशासन ने योग दिवस के उस आयोजन को, जो अक्सर औपचारिक और नीरस होता है, लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया। कोलकाता के उन लोगों के लिए, जो नदी के किनारों की शांत गरिमा के आदी हैं, यह हाई-टेक बदलाव शहर के उत्सव कैलेंडर में एक स्वागत योग्य, भले ही थोड़ा चौंकाने वाला अपग्रेड था।

यह क्यों मायने रखता है

बड़ी तस्वीर भारत के शहरी शासन में हो रहे बदलाव की है। जब राज्य किसी बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए ड्रोन तकनीक में निवेश करता है, तो यह 'स्मार्ट' सांस्कृतिक कूटनीति की ओर एक कदम है। सोशल मीडिया पर तुरंत साझा किए जाने वाले ऐसे भव्य आयोजन यह सुनिश्चित करते हैं कि क्षेत्रीय कार्यक्रमों को राष्ट्रीय और कभी-कभी वैश्विक स्तर पर पहचान मिले।

हालांकि, प्रभावी सार्वजनिक जुड़ाव और सांस्कृतिक विरासत को केवल तकनीक के प्रदर्शन का जरिया बनाने के बीच एक बारीक रेखा है। क्या 'योग संगम' की यह लहर लंबे समय तक लोगों को जोड़ पाएगी या यह केवल एक अस्थायी चलन बनकर रह जाएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि 'माई कोलकाता' या 'एडुग्राफ' जैसे प्लेटफॉर्म पारंपरिक मूल्यों और डिजिटल पीढ़ी के बीच की खाई को कितनी निरंतरता से पाटते हैं। जैसे ही हुगली के ऊपर रोशनी कम हुई, संदेश स्पष्ट था: शहर अब केवल दर्शक बने रहने में संतुष्ट नहीं है; वह खुद कहानी को आगे ले जाना चाहता है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।