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सपनों की यात्रा का दुखद अंत: पिथौरागढ़ सड़क हादसे में CRPF जवान और भाई की मौत

मातम में बदली नई कार लेने की खुशी, परिवार संग घर जा रहा था CRPF जवान; हादसे में मौत

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 21 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
सपनों की यात्रा का दुखद अंत: पिथौरागढ़ सड़क हादसे में CRPF जवान और भाई की मौत
सपनों की यात्रा का दुखद अंत: पिथौरागढ़ सड़क हादसे में CRPF जवान और भाई की मौत

एक नई गाड़ी में शुरू हुई खुशियों भरी यात्रा एक परिवार के लिए उस वक्त दुःस्वप्न में बदल गई, जब वे काठगोदाम से कनालीछीना जा रहे थे।

एक नई कार खरीदना किसी भी भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार के लिए एक बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन एक CRPF जवान के लिए यह खुशी चंद पलों में मातम में बदल गई। 4 जून की सुबह, CRPF में तैनात बलदेव कुमार अपनी पत्नी नीतू, भाई राजेंद्र और अपने दो बच्चों, अक्षिता और आरव के साथ काठगोदाम स्थित अपने आवास से निकले। वे पिथौरागढ़ के कनालीछीना जा रहे थे और यात्रा को लेकर काफी उत्साहित थे। हालांकि, मरोड़ा खान और बंतोली के बीच उनकी गाड़ी एक भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई, जिससे परिवार की यह बहुप्रतीक्षित यात्रा एक दर्दनाक हादसे में बदल गई।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि बलदेव कुमार और उनके भाई राजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल नीतू को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें इस त्रासदी की भयावहता का अंदाजा नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्ट्रेचर पर लेटी नीतू रोते हुए अपने पति और बच्चों के बारे में पूछ रही थीं, जबकि आसपास मौजूद लोग उन्हें अपने पति और देवर के निधन की दुखद सच्चाई से दूर रखने की कोशिश कर रहे थे।

सदमे में पूरा इलाका

इस हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और निवासी तुरंत हरकत में आए। एडीएम केएन गोस्वामी, एसडीएम नीतू डांगर और एसडीआरएफ (SDRF) तथा स्थानीय पुलिस की टीमों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला। नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा सहित स्थानीय प्रतिनिधि अस्पताल में मौजूद रहे ताकि पीड़ित परिवार को हर संभव मदद मिल सके। हालांकि बच्चे अक्षिता और आरव पैर और सिर में चोट लगने के बावजूद सुरक्षित हैं, लेकिन परिवार के दो मुख्य सदस्यों को खोने से वे पूरी तरह टूट चुके हैं।

यह क्यों मायने रखता है: सड़क सुरक्षा का सवाल

यह घटना भले ही एक परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी हो, लेकिन यह पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा के गंभीर मुद्दे को भी उजागर करती है। हालांकि मूल लेख और विभिन्न मीडिया आउटलेट्स ने इस हादसे के दुखद पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन व्यापक संदर्भ पहाड़ी जिलों में सड़क यात्रा के जोखिमों का है। एक आधुनिक और अच्छी स्थिति वाली कार होने के बावजूद, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में लंबी दूरी की ड्राइविंग का जोखिम अक्सर घातक साबित होता है।

यह घटना एक कड़वी याद दिलाती है कि वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद, बुनियादी ढांचा और सड़क सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं। जैसा कि हिंदुस्तान और अन्य क्षेत्रीय स्रोत इस घटना के बाद की स्थिति को कवर कर रहे हैं, अब ध्यान बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा जागरूकता की तत्काल आवश्यकता पर केंद्रित हो गया है, खासकर उन परिवारों के लिए जो इन जोखिम भरे रास्तों से गुजरते हैं। फिलहाल, प्रशासन ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, और पीछे छूट गया है एक ऐसा परिवार, जिसके घाव कोई भी मुआवजा या जांच नहीं भर सकती।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।