Politicalpedia
राज्य

सिक्किम में ऐतिहासिक थांगु सर्टोक गुम्पा आग में खाक, धार्मिक कलाकृतियों को भारी नुकसान

1965 में बना मठ सिक्किम की भीषण आग में नष्ट, धार्मिक धरोहरों को पहुंची क्षति

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 7 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें

उत्तरी सिक्किम में लगी एक विनाशकारी आग ने 60 साल पुराने थांगु सर्टोक गुम्पा को राख में बदल दिया है, जो इस क्षेत्र के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के लिए एक गहरा नुकसान है।

5 जून की देर रात लाचेन में लगी भीषण आग ने ऐतिहासिक थांगु सर्टोक गुम्पा को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे स्थानीय समुदाय स्तब्ध है। रात करीब 11:00 बजे शुरू हुई इस आग ने देखते ही देखते पूरे मठ परिसर को निगल लिया। 1965 से आस्था का प्रतीक रहा यह ढांचा अब केवल जलकर खाक हो चुका है। गुम्पा के अलावा, पास के दो रिहायशी घर भी पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गए।

तेजी से बढ़ा संकट

आग बुझाने के लिए स्थानीय निवासियों द्वारा की गई त्वरित कोशिशों के बावजूद, आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मठ के अंदर का अधिकांश सामान बचाना नामुमकिन हो गया। लाचेन पिपोन चो बांडु लाचेनपा ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि समुदाय के लोग परिसर में रखे पवित्र अवशेषों, प्राचीन थंगका (thangkas) और धार्मिक ग्रंथों को नहीं बचा सके।

चुंगथांग के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) अरुण छेत्री द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग का कारण तकनीकी खराबी हो सकती है। छेत्री ने बताया, "आग रसोई में लगे एक सोलर पैनल डिवाइस से शुरू हुई।" रसोई, जो पारंपरिक मिट्टी और पत्थर की दीवारों से बनी थी लेकिन जिसकी छत लकड़ी की थी, आग की चपेट में जल्दी आ गई, जिससे लपटें तेजी से बगल के स्टोर रूम और मुख्य मठ तक फैल गईं।

सांस्कृतिक प्रभाव का आकलन

हालांकि इस अग्निकांड में कई अपूरणीय कलाकृतियां नष्ट हो गईं, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि कुछ धार्मिक वस्तुओं—जिनमें मुख्य बुद्ध प्रतिमा और कुछ थंगका पेंटिंग शामिल हैं—को सुरक्षित निकाल लिया गया। फिर भी, 60 साल पुराने मठ का नष्ट होना थांगु और आसपास के लाचेन क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत के लिए एक बड़ा झटका है, जहां यह स्थल दशकों से धार्मिक शिक्षा और सामुदायिक मिलन का केंद्र रहा है।

मंत्री और स्थानीय विधायक समदुप लेप्चा ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और प्रभावित परिवारों तथा समुदाय के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दर्दनाक बताते हुए कहा कि यह मठ सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, हालांकि संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है।

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आग के कारणों की जांच जारी है। यह घटना उत्तरी सिक्किम के दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में लकड़ी से बने ऐतिहासिक ढांचों की सुरक्षा बनाए रखने की चुनौतियों को उजागर करती है। अब स्थानीय निवासी और नेता नुकसान के पूर्ण आकलन के कठिन कार्य में जुट गए हैं, जबकि पूरा क्षेत्र अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से को खोने का शोक मना रहा है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
न्यूज़रूम

पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क पूरे भारत से सत्यापित, स्रोत-आधारित राजनीतिक समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।