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लू और तूफान: जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज बिगड़ा

श्रीनगर स्थित मौसम विभाग (MeT) ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में भीषण गर्मी और शुष्क मौसम रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, इसके बाद आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी दी गई है।

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 12 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
लू और तूफान: जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज बिगड़ा
लू और तूफान: जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज बिगड़ा

जैसे-जैसे मौसम विभाग ने लू की चेतावनी जारी की है, पूरा क्षेत्र भीषण गर्मी से अचानक होने वाले बदलाव—तेज हवाओं और संभावित बाढ़—के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर में पारा लगातार चढ़ रहा है। गुरुवार को भी लोगों को भीषण गर्मी और शुष्क मौसम से राहत मिलने के आसार कम हैं। श्रीनगर और जम्मू के मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह गर्मी एक बड़ी चुनौती बन गई है, जिसके चलते मौसम विभाग (MeT) ने आधिकारिक तौर पर लू की एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें, क्योंकि तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है।

हालांकि, यह गर्मी जल्द ही एक बड़े बदलाव का सामना करने वाली है। मौसम विभाग का अनुमान है कि शुक्रवार से मौसम का मिजाज बदल जाएगा और पूरे क्षेत्र में गरज-चमक, बिजली कड़कने और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की गति 40-50 किमी प्रति घंटा और झोंके 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है, विशेष रूप से दक्षिण और उत्तर कश्मीर के हिस्सों में।

जोखिम का नाजुक दौर

भीषण गर्मी से अचानक बारिश में तब्दील होता मौसम अपने साथ कई पर्यावरणीय खतरे लेकर आता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 11 जून से 14 जून के बीच होने वाली तेज बारिश संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और भूस्खलन का कारण बन सकती है। हालांकि बारिश से गर्मी से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन ओलावृष्टि के साथ आने वाले ये तूफानी झोंके स्थानीय बुनियादी ढांचे और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं।

श्रीनगर स्थित MeT के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद का कहना है कि यह एक अस्थायी दौर है। वर्तमान पूर्वानुमान के अनुसार, 14 जून से 17 जून के बीच कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं, लेकिन 18 जून से 20 जून के बीच फिर से मौसम शुष्क और गर्म होने की संभावना है। किसान समुदाय के लिए सलाह स्पष्ट है: कृषि कार्य जारी रखें, लेकिन आगामी तूफानी गतिविधियों को देखते हुए सतर्क रहें।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

क्षेत्र में देखे जा रहे मौसम के ये अनिश्चित पैटर्न जलवायु अस्थिरता के एक व्यापक और चिंताजनक रुझान को दर्शाते हैं। कृषि और पर्यटन के लिए मौसमी चक्रों पर निर्भर रहने वाले इस क्षेत्र के लिए, भीषण लू और अचानक आने वाले तूफानों के बीच का यह उतार-चढ़ाव एक अनिश्चित माहौल पैदा करता है। यह केवल कुछ दिनों की परेशानी का मामला नहीं है, बल्कि यह आपदा प्रबंधन ढांचे पर बढ़ते दबाव को भी उजागर करता है। जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर 'weather Jammu' ट्रेंड कर रहा है, अधिकारियों का मुख्य ध्यान जन स्वास्थ्य सलाह और अचानक आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने पर केंद्रित है।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।