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सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: चार दिन की तेजी के बाद मुनाफावसूली से बाजार में नरमी

सोने चांदी का भाव 6 जुलाई 2026: लगातार चार दिन की तेजी के बाद सोने-चांदी में गिरावट, हफ्ते के पहले दिन दिल्ली से लेकर रांची तक क्या है भाव?

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 7 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: चार दिन की तेजी के बाद मुनाफावसूली से बाजार में नरमी
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: चार दिन की तेजी के बाद मुनाफावसूली से बाजार में नरमी

लगातार जारी तेजी के बाद, वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव के बीच निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने से भारतीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में नरमी आई है।

घरेलू सर्राफा बाजार में 6 जुलाई 2026 को राहत देखने को मिली, क्योंकि सोने और चांदी दोनों की कीमतें अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आ गईं। लगातार चार दिनों की जबरदस्त तेजी के बाद, निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना, जिसका असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के शुरुआती कारोबार में साफ दिखा।

5 अगस्त 2026 की डिलीवरी के लिए, सोना वायदा ₹1,47,135 प्रति 10 ग्राम पर खुला और बाद में ₹346 की गिरावट के साथ ₹1,47,032 पर कारोबार कर रहा था। चांदी ने भी इसी राह का अनुसरण किया; 4 सितंबर 2026 की डिलीवरी वाले वायदा में अधिक गिरावट देखी गई, जो ₹1,409 टूटकर ₹2,36,001 प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह गिरावट अत्यधिक अस्थिरता के दौर के बाद आई है, जिसमें कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था।

भौतिक बाजार की हकीकत

भौतिक सर्राफा बाजार में भी इसका असर स्पष्ट रूप से दिखा। स्थानीय जौहरियों के पास जाने वाले खुदरा ग्राहकों ने विभिन्न शुद्धता वाले सोने के दामों में कमी देखी। 24 कैरेट सोना ₹110 गिरकर ₹1,46,620 पर आ गया, जबकि 22 कैरेट सोना ₹100 की गिरावट के साथ ₹1,34,400 पर कारोबार कर रहा था। 18 कैरेट सोने में भी ₹80 की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹1,09,970 पर पहुंच गया। हाजिर बाजार में चांदी में अधिक तेज सुधार देखा गया, जो दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित अधिकांश प्रमुख शहरी केंद्रों में ₹5,000 गिरकर ₹2,45,000 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

मौजूदा मूल्य परिवर्तन केवल स्थानीय धारणा के बारे में नहीं है; यह वैश्विक व्यापक आर्थिक संकेतकों की सीधी प्रतिक्रिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका से आए हालिया रोजगार के आंकड़े, जो उम्मीद से कमजोर रहे, और वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक ब्याज दर वृद्धि की आशंकाओं को कम किया है। जब फेड दरें रोकने या नरम रुख अपनाने का संकेत देता है, तो यह आमतौर पर डॉलर पर दबाव कम करता है, जिससे बुलियन को स्थिर होने का मौका मिलता है।

हालांकि, इस सुधार की तीव्र प्रकृति—जहां हमने इस महीने की शुरुआत में बड़ी गिरावट देखी—यह बताती है कि निवेशक अभी भी घबराए हुए हैं। हालांकि इस अस्थिरता का प्राथमिक स्रोत बाहरी है, लेकिन भौतिक सोने के लिए घरेलू मांग एक प्रमुख कारक बनी हुई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी मुनाफावसूली उस बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत है जो कई सत्रों से तेजी पर था। औसत खरीदार के लिए, ये गिरावट अक्सर खरीदारी के अवसर के रूप में देखी जाती है, हालांकि उच्च कीमतों का माहौल पूरे देश में सतर्क खर्च के पैटर्न को निर्धारित कर रहा है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।