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ईरान समझौते की उम्मीदों से लुढ़के तेल के दाम, $90 के नीचे आने से ग्लोबल मार्केट ने ली राहत की सांस

तेल की कीमतें $90 के नीचे: ट्रंप द्वारा 'ईरान के साथ युद्ध खत्म' करने की घोषणा के बाद ब्रेंट और WTI में गिरावट

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 12 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
ईरान समझौते की उम्मीदों से लुढ़के तेल के दाम, $90 के नीचे आने से ग्लोबल मार्केट ने ली राहत की सांस
ईरान समझौते की उम्मीदों से लुढ़के तेल के दाम, $90 के नीचे आने से ग्लोबल मार्केट ने ली राहत की सांस

वाशिंगटन द्वारा तेहरान के साथ एक राजनयिक ढांचे की अचानक घोषणा के बाद भू-राजनीतिक तनाव कम होने से कच्चे तेल के वायदा भाव में गिरावट आई है।

शुक्रवार सुबह वैश्विक ऊर्जा बाजारों ने राहत की सांस ली, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में शामिल भू-राजनीतिक जोखिम का प्रीमियम कम होने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकियों और बढ़ते तनाव के एक सप्ताह के बाद, ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों की कीमतें तेजी से गिरीं और मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण $90 प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गईं।

बाजार की धारणा में यह बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद आया। जॉर्जिया में एक टेली-रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि 'ईरान के साथ युद्ध' प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। ट्रंप ने श्रोताओं को बताया कि एक ढांचागत समझौता तैयार है और उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में औपचारिक हस्ताक्षर हो जाएंगे। यह घोषणा एक ऐसे तनावपूर्ण सप्ताह के बाद आई है, जिसमें तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला करने की धमकी दी थी—जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

सुबह 7 बजे (IST) तक, बाजार की प्रतिक्रिया तत्काल और निर्णायक रही। WTI क्रूड 1.12% की गिरावट के साथ $86.73 पर कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट क्रूड 1.03% गिरकर $89.45 पर आ गया। जिन निवेशकों ने पूरा सप्ताह आपूर्ति संकट की आशंका में बिताया था, उन्होंने शिपिंग लेन के फिर से खुलने और फारस की खाड़ी में तनाव कम होने की संभावना को देखते हुए तेजी से कदम उठाए।

बयानों और हकीकत के बीच का अंतर

हालांकि बाजार ने उत्साह के साथ प्रतिक्रिया दी है, लेकिन स्थिति अभी भी अस्थिर और विरोधाभासी बनी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप की यह घोषणा उनके प्रशासन की उन शुरुआती चेतावनियों से एक बड़ा यू-टर्न है, जिसमें उन्होंने 'ईरान पर जोरदार प्रहार' करने की बात कही थी और गुरुवार को नियोजित हमलों को रद्द कर दिया था।

हालांकि, निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फारस' की रिपोर्ट बताती है कि तेहरान ने अभी तक किसी भी समझौते के मसौदे को मंजूरी नहीं दी है। यह विसंगति मौजूदा संघर्ष विराम की अनिश्चितता को दर्शाती है; जब तक कि कोई औपचारिक और सत्यापित दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते और होर्मुज जलडमरूमध्य को आधिकारिक रूप से खुला घोषित नहीं किया जाता, तब तक यह 'समझौता' एक वादे से ज्यादा कुछ नहीं है।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

भारत के लिए, जो अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है, यह अस्थिरता केवल किताबी नहीं है। तेल की कीमतों में अचानक उछाल सीधे घरेलू महंगाई को बढ़ाता है, चालू खाता घाटे (CAD) को चौड़ा करता है और रुपये पर दबाव डालता है। $90 के नीचे तेल के दाम आने से बाजार को बहुत जरूरी राहत मिली है, लेकिन यह यह भी रेखांकित करता है कि ट्विटर-कूटनीति और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में ऊर्जा सुरक्षा कितनी नाजुक बनी हुई है।

यहाँ पैटर्न स्पष्ट है: वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अब व्हाइट हाउस और तेहरान से आने वाले हर संकेत के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। हालांकि मौजूदा गिरावट राहत देती है, लेकिन बाजार अनिवार्य रूप से स्थिरता की उम्मीदों पर कारोबार कर रहा है। यदि वादा किया गया समझौता विफल रहता है या बातचीत रुक जाती है, तो हम उतनी ही तेजी से उलटफेर देख सकते हैं। यह साबित करता है कि तेल बाजार फिलहाल आपूर्ति और मांग के बुनियादी सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक सुर्खियों से ज्यादा संचालित हो रहा है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।