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भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत मांग से सोने-चांदी के बाजार में हलचल

मजबूत मांग और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सोने-चांदी के वायदा भाव में तेजी

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 22 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत मांग से सोने-चांदी के बाजार में हलचल
भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत मांग से सोने-चांदी के बाजार में हलचल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता का माहौल है, जिसके चलते निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी का रुख कर रहे हैं, जिसका असर घरेलू कीमतों पर भी दिख रहा है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार सुबह के कारोबार में सोने और चांदी के वायदा भाव में तेजी देखी गई। इसकी मुख्य वजह वैश्विक संकेतों की मजबूती और पश्चिम एशिया के हालात को लेकर बढ़ती चिंता है। अगस्त डिलीवरी के लिए सोने का अनुबंध 570 रुपये यानी 0.39 फीसदी बढ़कर 1,47,773 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यही रुख चांदी के बाजार में भी दिखा, जहां व्यापारी 22 जून की चांदी की दरों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच अपनी स्थिति को समायोजित कर रहे हैं।

यह तेजी केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। न्यूयॉर्क के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी ऐसा ही रुझान दिखा, जहां सोने के वायदा भाव 0.63 फीसदी बढ़कर 4,181.92 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए। बाजार के जानकारों का मानना है कि आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं को देखते हुए निवेशक कीमती धातुओं को अस्थिरता के खिलाफ एक पारंपरिक सुरक्षा कवच (हेज) मान रहे हैं।

हालांकि, बाजार की स्थिति एकतरफा नहीं है। जहां कुछ ट्रेडिंग डेस्क ने बुलियन में मजबूत शुरुआत की सूचना दी, वहीं अन्य जगहों पर दिन भर कीमतों में सुधार (करेक्शन) भी देखा गया। बाजार फिलहाल एक रस्साकशी के दौर में है: एक तरफ संस्थागत निवेशकों की ओर से सुरक्षित निवेश की मांग कीमतों को ऊपर ले जा रही है, तो दूसरी तरफ अमेरिका में महंगाई और डॉलर की मजबूती इन लाभों को सीमित कर रही है। विभिन्न वित्तीय अखबारों की विरोधाभासी रिपोर्टें यह दर्शाती हैं कि बाजार क्षेत्र से आने वाली हर नई खबर को लेकर बेहद संवेदनशील है।

बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है

यह अस्थिरता व्यापक आर्थिक चिंता का संकेत है। जब तेल समृद्ध क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर तुरंत पड़ता है। भारत के लिए, जो कच्चे तेल और बुलियन दोनों का बड़ा आयातक है, यह स्थिति दोहरी मार जैसी है। सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें अक्सर यह संकेत देती हैं कि निवेशकों का कागजी संपत्तियों और पारंपरिक बाजारों से भरोसा कम हो रहा है। आम निवेशक के लिए, 22 जून की चांदी की दर या सोने के स्पॉट प्राइस पर नजर रखना अब केवल दैनिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि यह समझने का पैमाना है कि बाजार इस संकट को कितना गहरा मानता है।

भविष्य में, इन कीमती धातुओं की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पश्चिम एशिया का संघर्ष स्थानीय बना रहता है या व्यापक रूप लेता है। यदि तेल की कीमतें बढ़ती रहीं, जैसा कि कुछ विश्लेषकों को डर है, तो सुरक्षा के उपाय के रूप में सोने और चांदी की मांग और बढ़ सकती है। इसके विपरीत, यदि राजनयिक तनाव कम होता है, तो ये लाभ उतनी ही तेजी से गायब भी हो सकते हैं। फिलहाल, बाजार का मिजाज सतर्क है और ट्रेडिंग फ्लोर पर दुनिया की बेचैनी साफ झलक रही है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।