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पुलिस फाइलों से स्क्रीनप्ले तक: आर. श्रीलेखा ने मलयालम सिनेमा पर लगाया बौद्धिक संपदा चोरी का आरोप

श्रीलेखा का दावा है कि उनकी कहानियों को चुराया गया है; उन्होंने सोशल मीडिया पर सबूतों के साथ पोस्ट साझा की

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 16 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
पुलिस फाइलों से स्क्रीनप्ले तक: आर. श्रीलेखा ने मलयालम सिनेमा पर लगाया बौद्धिक संपदा चोरी का आरोप
पुलिस फाइलों से स्क्रीनप्ले तक: आर. श्रीलेखा ने मलयालम सिनेमा पर लगाया बौद्धिक संपदा चोरी का आरोप

पूर्व आईपीएस अधिकारी और भाजपा पार्षद आर. श्रीलेखा ने दावा किया है कि दो सुपरहिट फिल्में, 'दृढ़म' (Dridham) और 'भूतकालम' (Bhoothakaalam), उनके अपने मौलिक साहित्यिक कार्यों से चुराई गई हैं।

रचनात्मक प्रेरणा और बौद्धिक संपदा की चोरी के बीच की रेखा एक बार फिर मलयालम फिल्म उद्योग में विवाद का विषय बन गई है। पूर्व आईपीएस अधिकारी से भाजपा पार्षद बनीं आर. श्रीलेखा ने सार्वजनिक रूप से 'दृढ़म' और 'भूतकालम' के निर्माताओं पर अपनी कहानियों को चुराने का आरोप लगाकर हलचल मचा दी है। श्रीलेखा ने सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें विस्तार से साझा कीं और दावा किया कि ये फिल्में उनकी निजी कहानियों का अनधिकृत रूपांतरण हैं।

श्रीलेखा के अनुसार, मार्टिन प्रक्कट द्वारा निर्देशित फिल्म 'दृढ़म', उनकी लघु कहानी 'करिनकुडी पुलिस स्टेशन' से सीधे ली गई है, जिसे उन्होंने वर्षों पहले एक साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित किया था। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल के लिंक भी दिए हैं, जहां उन्होंने पहले यह कहानी साझा की थी, ताकि वे अपनी मौलिकता का प्रमाण दे सकें। पूर्व अधिकारी ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली के करीब रहने के कारण उन्हें ऐसी कहानियों की गहरी समझ है, और फिल्म का मुख्य प्लॉट उनकी लिखी कहानी से काफी मिलता-जुलता है।

'भूतकालम' का कनेक्शन

ये आरोप 2022 की मनोवैज्ञानिक थ्रिलर 'भूतकालम' तक भी फैले हुए हैं। श्रीलेखा का दावा है कि यह फिल्म उनकी अनुभवात्मक कहानी 'भूत भवनम' का ही एक रूप है, जिसे उन्होंने 2021 में अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा किया था। उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि फिल्म का शीर्षक—'भूतकालम'—उनके मूल काम के साथ वैचारिक समानता रखता है।

उनकी आलोचना में एक बार-बार आने वाला तत्व अभिनेता शेन निगम की उपस्थिति है, जो दोनों फिल्मों में मुख्य भूमिका में हैं। हालांकि श्रीलेखा ने स्पष्ट किया कि वह अभिनेता के प्रति व्यक्तिगत स्नेह रखती हैं—उन्होंने 'दृढ़म' में उनके अभिनय की तुलना अपने एक पूर्व पुलिस सहयोगी से की—लेकिन उनका ध्यान पूरी तरह से निर्माण प्रक्रिया में रचनात्मक अखंडता की कमी पर है।

बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है

यह सार्वजनिक टकराव रचनात्मक समुदाय के भीतर एक चिंता को उजागर करता है: डिजिटल वितरण के इस दौर में मौलिक सामग्री की असुरक्षा। जब सार्वजनिक हस्तियां और लेखक यह दावा करते हैं कि उनके काम को हड़प लिया गया है, तो यह उद्योग के भीतर मजबूत सत्यापन और क्रेडिट प्रोटोकॉल की आवश्यकता को रेखांकित करता है। हालांकि डिजिटल प्लेटफॉर्म सामग्री को आसानी से व्यू और डाउनलोड करने की सुविधा देते हैं, लेकिन ये रचनाकारों को संभावित शोषण के प्रति भी उजागर करते हैं।

उद्योग के लिए, ऐसे आरोप केवल क्रेडिट का मामला नहीं हैं; ये मलयालम सिनेमा में बौद्धिक संपदा को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे के लिए एक चुनौती हैं। जैसे-जैसे डिजिटल परिदृश्य विकसित हो रहा है, लेखक और निर्माता अपनी बौद्धिक संपत्तियों की रक्षा के लिए सोशल मीडिया का उपयोग एक सार्वजनिक अदालत के रूप में कर रहे हैं। चाहे ये दावे औपचारिक कानूनी कार्रवाई का रूप लें या सार्वजनिक बहस तक सीमित रहें, यह घटना प्रोडक्शन हाउसों पर इस बात का दबाव डालती है कि वे अपनी पटकथाओं की गहन जांच सुनिश्चित करें, ठीक वैसे ही जैसे टीटीडी अपनी संवेदनशील हेल्थ और बुनियादी ढांचे की खरीद को सत्यापित एडवर्ट और ई-xii दस्तावेजीकरण प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रबंधित करता है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।