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करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस अब मलयालम सिनेमा में, 'ओडियन: द एज ऑफ इल्यूजन' के साथ रखा कदम

धर्मा प्रोडक्शंस ने पृथ्वीराज प्रोडक्शंस और निर्देशक राहुल सदाशिवन के साथ मिलकर मलयालम सिनेमा में अपनी पहली फिल्म का ऐलान किया है।

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 16 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस मलयालम पौराणिक महाकाव्य के लिए तैयार
करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस मलयालम पौराणिक महाकाव्य के लिए तैयार

अपनी रणनीतिक विस्तार योजना के तहत, धर्मा प्रोडक्शंस ने पृथ्वीराज प्रोडक्शंस के साथ साझेदारी कर महत्वाकांक्षी सुपरनैचुरल थ्रिलर 'ओडियन: द एज ऑफ इल्यूजन' के साथ मलयालम सिनेमा में अपनी शुरुआत की है।

भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा का परिदृश्य एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जहाँ मुंबई के पारंपरिक केंद्रों और दक्षिण भारत के फिल्म उद्योगों के बीच की दूरियां लगातार कम हो रही हैं। हिंदी कमर्शियल सिनेमा के दिग्गज, करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस ने आधिकारिक तौर पर केरल के समृद्ध फिल्म बाजार में प्रवेश की पुष्टि की है। यह बैनर 'ओडियन: द एज ऑफ इल्यूजन' के निर्माण के लिए पृथ्वीराज प्रोडक्शंस के साथ जुड़ रहा है। यह फिल्म उस डार्क और रहस्यमयी लोककथाओं पर आधारित है, जो निर्देशक राहुल सदाशिवन की पहचान बन चुकी हैं।

दिग्गजों का संगम

पृथ्वीराज सुकुमारन और मंजू वारियर अभिनीत यह फिल्म 19वीं सदी के केरल के इतिहास पर आधारित है। इसकी कहानी एक ऐसे भयानक 'शेप-शिफ्टर' (रूप बदलने वाले) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक मातृसत्तात्मक परिवार के लिए खतरा बन जाता है। यह फिल्म मनोवैज्ञानिक डर और पौराणिक कथाओं का एक अनूठा मिश्रण है। 'भूतकालम' और 'ब्रह्मयुगम' जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले निर्देशक राहुल सदाशिवन के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। फिल्म की प्रोडक्शन टीम भी बेहद प्रभावशाली है, जिसमें करण जौहर, अदार पूनावाला, अपूर्व मेहता और सुप्रिया मेनन शामिल हैं।

धर्मा के लिए यह एक सोची-समझी रणनीति है। करण जौहर अक्सर मलयालम फिल्म निर्माताओं की कहानी कहने की कला और साहस की तारीफ करते रहे हैं। उनका मानना है कि दर्शकों का भरोसा जीतने की इस इंडस्ट्री की क्षमता ही उन्हें इस साझेदारी की ओर खींच लाई। धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्व मेहता ने मलयालम बाजार में प्रवेश को 'स्वाभाविक विस्तार' बताया है और कहा है कि इस इंडस्ट्री की कहानी कहने की ताकत ही इस सहयोग का मुख्य आधार है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: पैन-इंडिया की ओर झुकाव

यह कदम केवल दो उद्योगों के मिलन के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारतीय मीडिया की बदलती शक्ति का प्रतिबिंब है। पृथ्वीराज सुकुमारन, जो एक बहुमुखी अभिनेता-निर्माता हैं और जिन्होंने कलात्मक संवेदनशीलता और मास-मार्केट अपील के बीच की खाई को सफलतापूर्वक पाटा है, उनके साथ जुड़कर धर्मा 'सांस्कृतिक जड़ों' से जुड़ने का संकेत दे रहा है।

बड़ी तस्वीर यह है कि पारंपरिक 'हिंदी फिल्म' का वर्चस्व खत्म हो रहा है। मुंबई के बड़े बैनर अब केवल अपनी फिल्मों को दक्षिण भारतीय भाषाओं में डब करने तक सीमित नहीं हैं; वे प्रासंगिक बने रहने के लिए क्षेत्रीय प्रतिभाओं और उनकी कहानी कहने की शैली में निवेश कर रहे हैं। यदि 'ओडियन: द एज ऑफ इल्यूजन' सफल होती है, तो यह आने वाले समय के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार करेगी कि कैसे बड़े स्टूडियो क्षेत्रीय बाजारों में खुद को ढाल सकते हैं, जहाँ वे 'पैन-इंडिया' मॉडल के बजाय राहुल सदाशिवन जैसे स्थानीय निर्देशकों को प्राथमिकता देंगे।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।