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फिजी से वडोदरा तक: कैसे सुलझी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की यह लंबी साजिश

फिजी में बैठे पूर्व नियोक्ता ने दी थी 'सुपारी': वडोदरा के व्यापारी पर फायरिंग करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 5 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
फिजी से वडोदरा तक: कैसे सुलझी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की यह लंबी साजिश
फिजी से वडोदरा तक: कैसे सुलझी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की यह लंबी साजिश

पुलिस ने एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विवाद से जुड़ी उस साजिश का खुलासा किया है, जिसने एक सोची-समझी हत्या की कोशिश का रूप ले लिया।

26 जून की रात वडोदरा की शांत सड़कें तब दहल उठीं, जब वाघोडिया चौकड़ी के पास कार सवार कपड़ा व्यापारी आशीष कुमार पर गोलियां चलाई गईं। जो घटना शुरुआत में महज एक रैंडम हिंसा लग रही थी, वह वास्तव में हजारों मील दूर से रची गई दो महीने की एक सोची-समझी साजिश का नतीजा थी। जांचकर्ताओं ने अब दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे गुजरात की सड़कों से लेकर फिजी में बैठे एक पूर्व नियोक्ता तक फैली इस खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है।

साजिश की परतें

वडोदरा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक संदीप सिंह ने पुष्टि की कि यह साजिश कथित तौर पर पीड़ित के पूर्व नियोक्ता जय दलाल द्वारा रची गई थी। दोनों के बीच कुमार के फिजी में काम करने के दौरान से ही पैसों को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। हिसाब बराबर करने के लिए, दलाल ने कथित तौर पर दुर्ग के एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर विक्रम प्रताप सिंह को इस हमले को अंजाम देने के लिए काम पर रखा।

योजना बेहद सटीक थी। विक्रम 20 अप्रैल को सिंगापुर से नई दिल्ली पहुंचा और तुरंत अपने साथी गुरजीत सिंह से मिल गया। अगले दो महीनों तक, दोनों ने कुमार की गतिविधियों पर नजर रखी और भागने के रास्तों की रेकी की। हैरानी की बात यह है कि वे स्थानीय माहौल में पूरी तरह घुल-मिल गए थे, और रेकी के दौरान उन्हें पूजा मॉल और बंसल मॉल में फिल्में देखते हुए सीसीटीवी कैमरों में भी कैद किया गया था।

तलाश और गिरफ्तारी

पुलिस की जांच डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को जोड़ने का एक बेहतरीन उदाहरण रही। मोबाइल फोन डेटा, सीसीटीवी फुटेज और ट्रेन टिकटों को ट्रैक करके अधिकारियों ने संदिग्धों का पता दुर्ग तक लगाया। वडोदरा पुलिस की टीमों ने छत्तीसगढ़ में स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर दो दिन तक ऑपरेशन चलाया और फिर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने 7 जुलाई का एक एयर टिकट बरामद किया, जिससे पता चलता है कि विक्रम ने फायरिंग के कुछ ही दिनों बाद देश छोड़कर फिजी भागने की योजना बनाई थी। हालांकि दो लोग अब हिरासत में हैं, लेकिन अब मुख्य साजिशकर्ता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। संदीप सिंह ने कहा कि अधिकारी जय दलाल के प्रत्यर्पण के लिए कानूनी रास्तों पर विचार कर रहे हैं ताकि उसे भारत में इस कॉन्ट्रैक्ट किलिंग में अपनी कथित भूमिका के लिए मुकदमे का सामना करना पड़े।

बड़ी तस्वीर

यह मामला एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहां आधुनिक तकनीक और वैश्विक आवाजाही का इस्तेमाल सीमाओं के पार व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए किया जा रहा है। फिजी और वडोदरा के बीच की दूरी कोई बाधा नहीं बनी; इसके बजाय, इसने अपराधियों को सुरक्षा का एक झूठा एहसास दिया, जिन्होंने सोचा था कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा उन्हें स्थानीय कानून से बचा लेगी।

यह हमारे शहरों में अपराध के बदलते स्वरूप की भी याद दिलाता है। जब एक पेशेवर—इस मामले में, एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर—को हत्या के लिए काम पर रखा जाता है, तो योजना का स्तर आवेगपूर्ण से बदलकर व्यवस्थित हो जाता है। जैसे-जैसे पुलिस इस मामले में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, यह घटना अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन सहयोग के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हुई है।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।