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विज्ञान और स्वास्थ्य

तिरुवनंतपुरम में फूड पॉइजनिंग का संकट: बासी मछली खाने से 28 लोग बीमार

आर्यनकोड में 28 लोगों को फूड पॉइजनिंग; छह का इलाज जारी, कल दो बच्चियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 18 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
तिरुवनंतपुरम में फूड पॉइजनिंग का संकट: बासी मछली खाने से 28 लोग बीमार
तिरुवनंतपुरम में फूड पॉइजनिंग का संकट: बासी मछली खाने से 28 लोग बीमार

आर्यनकोड और उझामलक्कल में एक के बाद एक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं ने केरल के स्थानीय बाजारों में बिकने वाली समुद्री मछली की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तिरुवनंतपुरम के शांत उपनगर अचानक स्वास्थ्य संकट की चपेट में हैं। पिछले एक हफ्ते में, आर्यनकोड बाजार से खरीदी गई मछली खाने के बाद कम से कम 28 लोगों को अस्पताल जाना पड़ा है। मरीजों में गंभीर रैशेज, उल्टी, दस्त और अंगों में सूजन जैसे लक्षण देखे गए हैं। कई मरीजों को SAT अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जिनमें से छह का अभी भी इलाज चल रहा है।

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब उझामलक्कल और कुट्टिचाल क्षेत्रों से भी मामले सामने आए। पीड़ितों में 10 और 15 साल की दो लड़कियां भी शामिल हैं, जिन्हें फूड पॉइजनिंग के बाद नेदुमंगड मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय खबरों के अनुसार, प्रभावित लोगों की संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई लोगों ने अपनी बीमारी का संबंध मछली से नहीं जोड़ा और सीधे इलाज कराया।

सप्लाई चेन पर उठते सवाल

आर्यनकोड बाजार जिले भर में समुद्री मछली वितरण का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ से सैकड़ों छोटे वाहनों के जरिए मछली पहुंचाई जाती है। यहाँ रोजाना सौ से अधिक कंटेनर लॉरी आती हैं, लेकिन मछली की गुणवत्ता और उसके स्रोत का पता लगाना मुश्किल है। व्यापारी और स्थानीय निवासी गुणवत्ता जांच की कमी पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसी चिंताएं बनी हुई हैं कि बर्फ और रासायनिक प्रिजर्वेटिव्स का उपयोग करके कई दिन पुरानी मछली को 'ताजा' दिखाकर बेचा जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 'कोल्ड चेन' का टूटना ही इसका मुख्य कारण है। मछली पकड़े जाने से लेकर उपभोक्ता की रसोई तक पहुंचने के बीच तापमान का सही बना रहना जरूरी है। जब मछली को गलत तापमान पर रखा जाता है या बिना पर्याप्त कूलिंग के लंबी दूरी तक ले जाया जाता है, तो बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे ऐसे टॉक्सिन्स बनते हैं जो गंभीर एलर्जी और पेट संबंधी बीमारियों का कारण बनते हैं।

बड़ी तस्वीर: यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह प्रकोप कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि स्थानीय बाजारों में खाद्य सुरक्षा निगरानी की खामियों को दर्शाता है। हालांकि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने आर्यनकोड में दो स्थानों से नमूने लिए हैं और लगभग 50 किलोग्राम संदिग्ध बासी मछली जब्त की है, लेकिन यह घटना सप्लाई चेन में एक खतरनाक अंतर को उजागर करती है। आम उपभोक्ता के लिए, मछली जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों के स्रोत और भंडारण के इतिहास की पुष्टि न कर पाना, दैनिक भोजन को एक स्वास्थ्य जोखिम में बदल देता है।

राज्य जहां वायनाड से लेकर पथानामथिट्टा तक शिगेला और वायरल बुखार जैसी बीमारियों से जूझ रहा है, वहीं तिरुवनंतपुरम की स्थिति सख्त निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है। जब तक लैब टेस्ट के परिणाम नहीं आ जाते, अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है: किसी भी ऐसी मछली से बचें जिसका रंग बदला हुआ हो या जिसमें असामान्य गंध आ रही हो।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।