ED की जांच का दायरा बढ़ा: भर्ती घोटाले में कामरहाटी के विधायक मदन मित्रा पर शिकंजा
मदन मित्रा | बंगाल में ED की मैराथन छापेमारी, क्या अब मुश्किल में हैं मदन मित्रा?
केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का नाम नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़ता दिख रहा है।
शनिवार की सुबह एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में सक्रिय दिखी। केंद्रीय जांचकर्ताओं ने आज कोलकाता में कई स्थानों पर छापेमारी की, जो राज्य के नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच में एक बड़ा मोड़ है। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र कामरहाटी के विधायक मदन मित्रा हैं, जिनके भवानीपुर स्थित आवास की तलाशी ली जा रही है।
अयान शील से हाल ही में हुई पूछताछ के बाद जांच एजेंसी के हाथ कुछ नए सुराग लगे हैं, जो विधायक के घर से आगे तक जा रहे हैं। ED की एक टीम 'जोका आवासन' हाउसिंग कॉम्प्लेक्स पहुंची, जहां कथित तौर पर मदन मित्रा करीब एक दशक पहले एक फ्लैट में अक्सर आते-जाते थे। ED सूत्रों का कहना है कि यह संपत्ति तृणमूल नेता से जुड़ी है, जिससे मनी ट्रेल (पैसे के लेनदेन) की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही, यह छापेमारी शहर के अन्य हिस्सों में भी जारी है। इसी ऑपरेशन के तहत बेलेघाटा में एक व्यवसायी के घर पर भी छापेमारी की गई। हालांकि एजेंसी ने जब्त किए गए दस्तावेजों के बारे में अभी कोई खुलासा नहीं किया है, लेकिन इन समन्वित छापों से संकेत मिलता है कि भर्ती मामले के मुख्य संदिग्धों से पूछताछ के दौरान मिले वित्तीय लेनदेन के सबूतों को पुख्ता करने की कोशिश की जा रही है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
यह हालिया कार्रवाई कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि राज्य की सत्ता के ढांचे पर ED के बढ़ते दबाव का हिस्सा है। अयान शील की गवाही को मदन मित्रा से जुड़ी संपत्तियों से जोड़कर, केंद्रीय एजेंसी यह संकेत दे रही है कि भर्ती घोटाले की जांच अब बिचौलियों से आगे बढ़कर स्थापित राजनीतिक हस्तियों तक पहुंच रही है। तृणमूल कांग्रेस के लिए, ये छापेमारी एक बड़ी राजनीतिक चुनौती पेश कर रही है और चुनावों के नजदीक आते ही पार्टी को रक्षात्मक स्थिति में ला रही है।
आज की राजनीतिक स्थिति काफी तनावपूर्ण है, क्योंकि एक तरफ ED की छापेमारी चल रही है, तो दूसरी तरफ सांसद अभिषेक बनर्जी के घर पर पुलिस की मौजूदगी की खबरें भी सामने आई हैं। यह देखना बाकी है कि क्या ये घटनाएं भर्ती मामले में कोई निर्णायक मोड़ साबित होंगी या यह कानूनी प्रक्रिया का एक लंबा हिस्सा बनी रहेंगी। फिलहाल, पूरा ध्यान इन ठिकानों से जुटाए गए सबूतों पर है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।