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DRS का संकट: भारत के खिलाफ अफगानिस्तान के 'सुस्त' फैसलों ने कैसे बिगाड़ा खेल

'हम बेहद सुस्त थे, यह नहीं था...': DRS की गलतियों पर बोले अफगान कोच पाइबस

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 7 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
DRS का संकट: भारत के खिलाफ अफगानिस्तान के 'सुस्त' फैसलों ने कैसे बिगाड़ा खेल
DRS का संकट: भारत के खिलाफ अफगानिस्तान के 'सुस्त' फैसलों ने कैसे बिगाड़ा खेल

कोच रिचर्ड पाइबस ने स्वीकार किया कि डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) को लेकर टीम के आत्मविश्वास की कमी के कारण भारत को अपनी पहली पारी में विशाल स्कोर खड़ा करने में मदद मिली।

भारत और अफगानिस्तान के बीच खेला जा रहा एकमात्र टेस्ट मैच इस बात का उदाहरण बन गया है कि कैसे चूके हुए मौके मैच का परिणाम बदल सकते हैं। भारत ने अपनी पहली पारी में 8 विकेट पर 546 रन बनाकर पारी घोषित की। इस दौरान अफगान टीम न केवल भारतीय बल्लेबाजों के दबदबे से जूझती दिखी, बल्कि DRS का प्रभावी ढंग से उपयोग न कर पाने की अपनी नाकामी से भी परेशान रही। ऐसे तीन स्पष्ट मौके थे जहां तकनीक अफगानिस्तान को महत्वपूर्ण सफलता दिला सकती थी, लेकिन कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने रिव्यू लेने का फैसला नहीं किया।

चूक का सिलसिला

मुश्किलें मेहमान टीम के लिए शुरुआत से ही शुरू हो गई थीं। शनिवार को जब केएल राहुल सिर्फ 16 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तब उन्होंने अजमतुल्लाह उमरजई की गेंद पर किनारा लिया था। मैदानी अंपायर ने इसे आउट नहीं दिया और शाहिदी ने रिव्यू नहीं लिया, जिसका फायदा उठाकर राहुल ने शतक जड़ दिया। रविवार सुबह गेंदबाजी इकाई की निराशा और बढ़ गई। 89वें ओवर में उमरजई की एक और गेंद शुभमन गिल के पैड पर लगी; एक बार फिर अपील ठुकरा दी गई और अफगान खिलाड़ी खामोश रहे, जबकि बाद में रिप्ले में साफ दिखा कि गेंद स्टंप्स पर लग रही थी।

अनिर्णय की यह स्थिति अगले ही ओवर में जारी रही। जिया-उर-रहमान की गेंद ऋषभ पंत के बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर रहमानुल्लाह गुरबाज के हाथों में गई। एक बार फिर रिव्यू न लेने के कारण एक संभावित विकेट हाथ से निकल गया। ये गलतियां बहुत महंगी साबित हुईं और भारत ने बिना किसी डर के बल्लेबाजी जारी रखी, जिससे वे 127 ओवरों में एक विशाल स्कोर तक पहुंच गए।

पाइबस ने 'सुस्ती' पर बात की

दिन का खेल खत्म होने के बाद अफगानिस्तान के कोच रिचर्ड पाइबस ने टीम की कमियों को छिपाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने टीम को "बेहद सुस्त" बताया और कहा कि दबाव में निर्णय लेने की प्रक्रिया में जरूरी आत्मविश्वास की कमी थी। पाइबस ने स्पष्ट किया कि हालांकि अंतिम निर्णय कप्तान का होता है, लेकिन वह मैदान पर अपने साथियों पर काफी निर्भर रहते हैं, जिसमें विकेटकीपर, फील्डर और खुद गेंदबाज की अंतर्ज्ञान शामिल है।

पाइबस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "कप्तान के पास फैसला लेने के लिए बहुत कम समय होता है और वह फीडबैक पर निर्भर रहते हैं।" उन्होंने जोर दिया कि दिन का खेल खत्म होने के बाद टीम ने संचार में आई इस कमी को दूर करने के लिए खुलकर चर्चा की है। हालांकि अफगान गेंदबाजों ने हिम्मत दिखाई—खासकर दूसरे दिन के पहले घंटे में और मोहम्मद सलीम के छह विकेट के प्रदर्शन के जरिए—लेकिन DRS पर अपने फैसलों पर भरोसा न कर पाना भारत की रन गति को रोकने में एक बड़ी बाधा साबित हुआ।

गलती की गुंजाइश

टेस्ट क्रिकेट के इस उच्च-स्तरीय माहौल में, DRS की ये गलतियां अफगानिस्तान टीम के लिए सीखने का एक कठिन सबक हैं। हालांकि वे पारी में आठ विकेट लेने में सफल रहे, लेकिन चूके हुए तीन मौकों ने सीधे तौर पर भारत की क्रीज पर लंबी पारी को प्रभावित किया। जैसे-जैसे टीम आगे देख रही है, यह घटना एक कड़ा संदेश है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी दक्षता के साथ-साथ तेज और निर्णायक रणनीतिक जागरूकता भी जरूरी है। लंबे प्रारूप में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही टीम के लिए, खेल को समझना और दबाव वाली अपीलों के दौरान अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करना भविष्य के दौरों के लिए अनिवार्य होगा।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क पूरे भारत से सत्यापित, स्रोत-आधारित राजनीतिक समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।