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'नरसंहार को सही ठहराना': UNSC में भारत ने अफगानिस्तान पर हमलों को लेकर पाकिस्तान को घेरा

'नरसंहार को सही ठहराना': UNSC में भारत ने अफगानिस्तान पर हमलों को लेकर पाकिस्तान को घेरा

द्वारा बिज़नेस डेस्कप्रकाशित 9 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
'नरसंहार को सही ठहराना': UNSC में भारत ने अफगानिस्तान पर हमलों को लेकर पाकिस्तान को घेरा
'नरसंहार को सही ठहराना': UNSC में भारत ने अफगानिस्तान पर हमलों को लेकर पाकिस्तान को घेरा

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने इस्लामाबाद की कड़ी आलोचना करते हुए उस पर नागरिकों के नरसंहार और एक लैंडलॉक्ड (भू-आबद्ध) पड़ोसी देश का आर्थिक गला घोंटने का आरोप लगाया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का मंच, जो आमतौर पर सधे हुए राजनयिक बयानों के लिए जाना जाता है, इस सप्ताह भारत द्वारा अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हालिया सैन्य अभियानों को लेकर किए गए तीखे प्रहार का गवाह बना। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने बिना किसी लाग-लपेट के इस्लामाबाद की सीमा पार हमलों की कार्रवाई को 'नरसंहार' करार दिया और इस धारणा को खारिज कर दिया कि ये वैध आतंकवाद-विरोधी प्रयास हैं।

भारतीय दूत ने जमीनी हकीकत की भयावह तस्वीर पेश की। UNAMA के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि केवल 2026 के पहले तीन महीनों में 372 नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए—यह वह दौर था जब रमजान के दौरान हताहतों की संख्या में भारी उछाल देखा गया। पर्वथनेनी ने तर्क दिया कि 'नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देना' एक रणनीतिक धोखा है, जो अपराधी को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, विशेष रूप से भेदभाव और आनुपातिकता के सिद्धांतों के उल्लंघन से मुक्त नहीं करता है।

सीमा से परे: आर्थिक शिकंजा

यह आलोचना केवल सैन्य घुसपैठ तक ही सीमित नहीं रही। भारत ने पाकिस्तान पर 'व्यापार और पारगमन आतंकवाद' (trade and transit terrorism) का अभ्यास करने का आरोप लगाया, जिसके जरिए वह अफगानिस्तान की लैंडलॉक्ड स्थिति का हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। माल की आवाजाही और सीमा पार व्यापार में बाधा डालकर, इस्लामाबाद न केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर की अवहेलना कर रहा है, बल्कि लैंडलॉक्ड विकासशील देशों से संबंधित स्थापित अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का भी उल्लंघन कर रहा है।

दोहरी रणनीति—सैन्य आक्रामकता के साथ आर्थिक अलगाव—ने विभिन्न हलकों से निंदा बटोरी है। पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने भी सार्वजनिक रूप से इस्लामाबाद से काबुल के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। नई दिल्ली के लिए, यह पाखंड का स्पष्ट मामला है, जहां जो देश खुद को आतंकवाद से लड़ने वाला बताता है, वही कमजोर आबादी के खिलाफ इसे अंजाम देने का आरोपी है।

बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है

यह राजनयिक टकराव नई दिल्ली के सख्त होते रुख को दर्शाता है, क्योंकि अफगानिस्तान में स्थिति एक गहरे मानवीय संकट में बदल रही है। इन मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाकर, भारत नागरिक मौतों और आर्थिक नाकेबंदी के लिए जवाबदेही तय करने का प्रयास कर रहा है, जो पहले से ही नाजुक अफगान अर्थव्यवस्था को पूर्ण पतन की ओर धकेल रही है।

इसका व्यापक निहितार्थ पाकिस्तान के 'आधिकारिक तौर पर प्रायोजित' विमर्शों पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय नजर है, जिसे भारत लगातार गलत सूचना बताकर खारिज करता रहा है। चूंकि क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा अस्थिर बना हुआ है, ऐसे में इन नागरिक मौतों की स्वतंत्र और संयुक्त राष्ट्र समर्थित जांच के लिए भारत का जोर एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है: यानी चुपचाप चिंता जताने के बजाय अब बहुपक्षीय दबाव बनाना। क्या इससे नीति में बदलाव आएगा या यथास्थिति बनी रहेगी, यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा सवाल है।

द्वारा बिज़नेस डेस्क
अर्थव्यवस्था और बाज़ार

Business Desk at PoliticalPedia covers economy & markets for an Indian audience in English and Hindi.