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धर्मस्थल विवाद: सीटी रवि ने ₹200 करोड़ के कथित अभियान की CBI जांच की मांग की

धर्मस्थल षड्यंत्र की व्यापक जांच CBI को सौंपने की मांग करते हुए सीटी रवि ने सीएम डीके शिवकुमार को लिखा खुला पत्र

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 17 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
धर्मस्थल विवाद: सीटी रवि ने ₹200 करोड़ के कथित अभियान की CBI जांच की मांग की
धर्मस्थल विवाद: सीटी रवि ने ₹200 करोड़ के कथित अभियान की CBI जांच की मांग की

बीजेपी नेता सीटी रवि ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से औपचारिक रूप से मांग की है कि धर्मस्थल मंदिर और डॉ. वीरेंद्र हेगड़े के खिलाफ कथित सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराई जाए।

कर्नाटक के सबसे सम्मानित तीर्थ स्थलों में से एक, धर्मस्थल क्षेत्र की शांति को एक बड़ी साजिश के नए आरोपों ने भंग कर दिया है। एमएलसी सीटी रवि ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एक खुला पत्र लिखकर इस मामले को तूल दिया है। उनका तर्क है कि हालिया अदालती दस्तावेज मंदिर और इसके धर्माधिकारी डॉ. वीरेंद्र हेगड़े की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के एक समन्वित प्रयास की ओर इशारा करते हैं।

इस विवाद के केंद्र में एक कानूनी याचिका है जिसने कई नामों को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। पत्र में उद्धृत अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, मामले के संबंध में कई व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें अभिनेता प्रकाश राज, कार्यकर्ता महेश शेट्टी थिमरोडी और सोशल मीडिया के विभिन्न चेहरे शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि इस संस्थान के खिलाफ एक व्यवस्थित और दीर्घकालिक दुष्प्रचार अभियान चलाने के लिए कथित तौर पर ₹200 करोड़ का फंड जुटाया गया था।

केंद्रीय जांच की मांग

वर्षों से मंदिर प्रशासन लगातार आरोपों और सार्वजनिक आलोचनाओं का सामना कर रहा है। हालांकि इन्हें शुरू में अलग-थलग घटनाएं माना गया था, लेकिन कथित वित्तीय समर्थन के पैमाने ने इस पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। रवि का पत्र इस बात पर जोर देता है कि शामिल संसाधनों की भारी मात्रा यह बताती है कि यह कोई स्वतःस्फूर्त विरोध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अभियान था।

पत्र में कहा गया है, "सवाल सिर्फ आरोपों का नहीं है, बल्कि यह है कि इसका खर्च कौन उठा रहा था।" सीबीआई जांच की मांग इस संदेह से उपजी है कि इस नेटवर्क की पहुंच राज्य की सीमाओं से बाहर तक हो सकती है। प्रशासन से अब यह जांच करने का आग्रह किया जा रहा है कि क्या यह प्रमुख हिंदू धार्मिक संस्थानों को अस्थिर करने के उद्देश्य से बनाई गई किसी बड़ी, संभवतः विदेशी फंड से संचालित रणनीति का हिस्सा है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

यह घटनाक्रम राज्य में धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवादों को संभालने के तरीके में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। स्थानीय याचिकाओं को एक विशाल कथित फंडिंग नेटवर्क से जोड़कर, सीबीआई जांच की मांग ने इसे एक स्थानीय कानूनी विवाद से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के संभावित चिंता के विषय में बदल दिया है। यदि इतने बड़े पैमाने पर संगठित अभियान के अस्तित्व की पुष्टि होती है, तो यह "प्रतिष्ठा युद्ध" (reputation warfare) के एक ऐसे पैटर्न का संकेत देता है जो भारत भर के अन्य प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्रों को भी प्रभावित कर सकता है।

यदि जांच की अनुमति दी जाती है, तो यह निर्धारित करना होगा कि क्या यह वास्तव में सबूतों पर आधारित साजिश है या "शैडो नेटवर्क" के इन आरोपों का उपयोग याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए प्राथमिक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। फिलहाल, सबकी नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील सांस्कृतिक मामले में केंद्रीय हस्तक्षेप की अनुमति देते हैं या नहीं।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।