कांग्रेस के SC और अल्पसंख्यक विभाग का कथित अत्याचारों के खिलाफ संयुक्त आंदोलन
कांग्रेस के अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक विंग ने अत्याचारों के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खोलने की योजना बनाई

हाशिए पर मौजूद समूहों के बीच अपना समर्थन मजबूत करने के उद्देश्य से, कांग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति (SC) और अल्पसंख्यक विभागों ने व्यवस्थित भेदभाव के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
कांग्रेस पार्टी केंद्र पर अपना राजनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए तैयार है। 6 जून, 2026 को पार्टी ने एक समन्वित राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की, जिसका उद्देश्य हाशिए पर मौजूद समुदायों के खिलाफ हो रहे कथित व्यापक अत्याचारों को उजागर करना है। अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक विभागों को एक साथ लाकर, पार्टी एक ऐसा संयुक्त मोर्चा बनाना चाहती है जो दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों की शिकायतों को संबोधित करे और संस्थागत पूर्वाग्रह व भेदभावपूर्ण नीतियों पर ध्यान केंद्रित करे।
बढ़ता संस्थागत संघर्ष
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक संयुक्त सम्मेलन के दौरान, दोनों विंग के नेताओं ने उत्पीड़ित समूहों के अधिकारों के प्रति सरकार की कथित उदासीनता को दूर करने की रणनीति तैयार की। SC विभाग के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख व राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने तर्क दिया कि वर्तमान प्रशासनिक तंत्र—विशेष रूप से पुलिस और नौकरशाही—लगातार पूर्वाग्रहपूर्ण मानसिकता के साथ काम कर रहा है।
नेतृत्व ने व्यवस्थित उपेक्षा के प्रमाण के रूप में विशिष्ट नीतिगत असमानताओं की ओर इशारा किया। विवाद का एक मुख्य बिंदु छात्रवृत्ति पात्रता का ढांचा है; SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए वार्षिक आय सीमा ₹2.5 लाख पर सीमित है। इसके विपरीत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी के लिए आय सीमा ₹8 लाख है। कांग्रेस का दावा है कि यह विसंगति संस्थागत समर्थन में गहरे भेदभाव को दर्शाती है।
संसद सत्र से पहले बढ़ता दबाव
यह अभियान संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले गति पकड़ने के लिए तैयार किया गया है। लामबंदी का मुख्य केंद्र 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर होने वाला एक बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा, जिसमें देशभर से सांसदों, विधायकों और स्थानीय सामुदायिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह समय रणनीतिक है, जिसका उद्देश्य संसद में कमजोर वर्गों की स्थिति पर बहस के लिए सरकार को मजबूर करना है, क्योंकि विपक्ष सरकार को उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड पर घेरने की कोशिश कर रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी से परे, समन्वय के प्रयास जिला और ब्लॉक स्तर तक विस्तारित किए जाएंगे। इमरान प्रतापगढ़ी ने जोर देकर कहा कि दोनों विभाग एक सहायता नेटवर्क स्थापित करेंगे ताकि उत्पीड़न की खबरें आने पर वे पीड़ितों के साथ खड़े हो सकें। इस जमीनी रणनीति को मजबूत करने के लिए, इस महीने के अंत में लखनऊ में एक संयुक्त सलाहकार परिषद की बैठक निर्धारित की गई है, जहां आयोजक अपनी लामबंदी की रणनीति को और बेहतर बनाएंगे।
इस संयुक्त आंदोलन का महत्व नागरिक अधिकारों के एक सामान्य बैनर तले अलग-अलग सामाजिक समूहों को एकजुट करने के प्रयास में निहित है। वित्त और विकास निगमों के लिए अपर्याप्त फंडिंग जैसी आर्थिक असमानताओं और सामाजिक अत्याचारों दोनों को संबोधित करके, कांग्रेस हाशिए पर मौजूद लोगों के समर्थक के रूप में अपनी स्थिति फिर से हासिल करना चाहती है। 20 जुलाई की रैली की सफलता भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों से पहले इन समुदायों को एकजुट करने की पार्टी की क्षमता के लिए एक लिटमस टेस्ट साबित होगी।
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