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मुन्नार पर मंडराया संकट: बारिश की कमी से गहरा सकता है जल और बिजली का संकट

मुन्नार में मानसून की बेरुखी से पेयजल और बिजली आपूर्ति पर मंडराया खतरा

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 28 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
मुन्नार पर मंडराया संकट: बारिश की कमी से गहरा सकता है जल और बिजली का संकट
मुन्नार पर मंडराया संकट: बारिश की कमी से गहरा सकता है जल और बिजली का संकट

पहाड़ी इलाकों में जून के महीने में होने वाली मूसलाधार बारिश इस बार महज फुहारों में सिमट गई है, जिससे जलवायु परिवर्तन और आने वाले महीनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

धुंध की चादर में लिपटे मुन्नार की पहाड़ियां, जो आमतौर पर जून के अंत तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की भरपूर बारिश से सराबोर रहती हैं, इस साल असामान्य रूप से सूखी नजर आ रही हैं। केरल की शान माना जाने वाला यह हिल स्टेशन इस बार मानसून की बेरुखी का सामना कर रहा है, जिससे स्थानीय प्रशासन और निवासी जल और बिजली संकट की आशंका से सहमे हुए हैं।

बारिश में भारी कमी

27 जून तक के आंकड़ों पर गौर करें तो मौसम के बदलते मिजाज की चिंताजनक तस्वीर सामने आती है। 1 जनवरी से 27 जून 2025 के बीच, क्षेत्र में 259.22 सेमी बारिश दर्ज की गई थी। इसके विपरीत, इस साल इसी अवधि में केवल 72.07 सेमी बारिश हुई है, जो कि 187.15 सेमी की भारी गिरावट है।

महीनेवार आंकड़ों का विश्लेषण भी यही कहानी बयां करता है। जून का महीना मानसून का मुख्य समय होता है, लेकिन 1 जून से 27 जून के बीच केवल 40.85 सेमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 128.12 सेमी बारिश हुई थी। 2022 और 2023 के कमजोर वर्षों की तुलना में भी, मौजूदा रुझान एक निरंतर अस्थिरता को दर्शाता है, जहां पहाड़ियां सुबह के बादलों और छिटपुट बारिश के बीच झूल रही हैं।

पर्यटकों का विरोधाभास

दिलचस्प बात यह है कि इस अनिश्चित मौसम ने यहां आने वाले पर्यटकों के उत्साह को कम नहीं किया है। वास्तव में, साफ सुबह और दोपहर में हल्की फुहारों वाले इस असामान्य मौसम ने इस जून में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की है। पर्यटक सुहावने मौसम का आनंद लेने के लिए पहाड़ियों की ओर उमड़ रहे हैं, जबकि वे इस बात से अनजान हैं कि सतह के नीचे संसाधनों का संकट गहराता जा रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: बड़ी तस्वीर

यह बदलाव केवल एक स्थानीय मौसम विसंगति नहीं है; यह पश्चिमी घाट के सामने आने वाली व्यापक जलवायु चुनौतियों का संकेत है। मुन्नार राज्य की जलविद्युत और जल प्रबंधन प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण कैचमेंट क्षेत्र के रूप में कार्य करता है। यदि जुलाई और अगस्त के महीनों में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई, तो बिजली उत्पादन और सार्वजनिक जल आपूर्ति पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

मानसून के 'देरी' या 'कमजोर' होने का चलन यह बताता है कि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को, जो विश्वसनीय और भारी बारिश के आधार पर बनाया गया था, अब पुनर्विचार की आवश्यकता है। देर से होने वाली बारिश पर निर्भर रहना एक जुआ है, जो जलवायु के बदलते मिजाज के साथ और अधिक खतरनाक होता जा रहा है। फिलहाल, सबकी निगाहें आसमान पर टिकी हैं, इस उम्मीद में कि मुन्नार को जिस बारिश की सख्त जरूरत है, वह जल्द ही होगी।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।