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ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, दलाल स्ट्रीट में तेजी: सेंसेक्स और निफ्टी ने बढ़त बनाई

तेल की कीमतों में गिरावट और एशियाई बाजारों के सकारात्मक रुझानों के बीच शेयर बाजार में तेजी

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 25 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, दलाल स्ट्रीट में तेजी: सेंसेक्स और निफ्टी ने बढ़त बनाई
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, दलाल स्ट्रीट में तेजी: सेंसेक्स और निफ्टी ने बढ़त बनाई

वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने भारतीय बाजारों को एक जरूरी सहारा दिया है, जिससे शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सूचकांकों में तेजी देखी गई।

दलाल स्ट्रीट ने गुरुवार सुबह उत्साह के साथ शुरुआत की, जिसमें बीएसई सेंसेक्स 440.23 अंक चढ़कर 77,435.76 के स्तर पर पहुंच गया। एनएसई निफ्टी ने भी इसी राह पर चलते हुए 137.80 अंकों की बढ़त के साथ 24,147.60 पर कारोबार किया। बुधवार को बाजार में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के बाद, आज सुबह की यह रैली बताती है कि निवेशकों का भरोसा मजबूत हो रहा है और वे काफी हद तक हालिया भू-राजनीतिक चिंताओं से बाहर निकल रहे हैं।

इस सकारात्मक गति का मुख्य कारण वैश्विक तेल कीमतों में नरमी है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.70% गिरकर 72.49 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के वी.के. विजयकुमार ने बताया कि 73 डॉलर के स्तर से नीचे आना घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए फिलहाल सबसे बड़ी सकारात्मक मैक्रो-आर्थिक खबर है, जो चालू खाते के घाटे और महंगाई के दबाव से राहत दिला सकती है।

वैश्विक संदर्भ

यह आशावाद केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख है, जिसमें दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5% से अधिक और जापान का निक्केई 225 लगभग 4% चढ़ गया है। बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम—जो मध्य पूर्व में तनाव के कारण बढ़ गया था—अब कम हो रहा है। आपूर्ति की स्थिति स्थिर होने के संकेतों के साथ, वैश्विक व्यापारी वापस इक्विटी की ओर रुख कर रहे हैं, जो स्थानीय बाजार के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है।

हालांकि, स्थिति अभी भी मिली-जुली है। जहां व्यापक बाजार का रुझान सकारात्मक है, वहीं व्यक्तिगत शेयरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे दिग्गज शेयरों में बढ़त को इंफोसिस, टाइटन और पावर ग्रिड जैसे शेयरों ने संतुलित कर दिया। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख अभी भी नजर रखने वाली बात है; एक्सचेंज के आंकड़ों से पता चलता है कि बुधवार को FII शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने 1,843.40 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। व्यापक बाजार में उछाल के बावजूद इस प्रवृत्ति पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

भारतीय बाजारों पर तेल की कीमतों का प्रभाव घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख संकेतक है। जब कच्चे तेल की कीमतें कम होती हैं, तो रुपये पर दबाव और विनिर्माण लागत कम हो जाती है, जिससे कंपनियों के मार्जिन को राहत मिलती है। हालांकि मौजूदा रैली उत्साहजनक है, लेकिन यह तेल की कीमतों में स्थिरता और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करती है। खुदरा निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है: तकनीकी रूप से बाजार अभी तेजी के पक्ष में है, लेकिन बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम कितनी जल्दी पूरी तरह से खत्म होते हैं।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।