वैभव सूर्यवंशी के बाद अब छोटे भाई आशीर्वाद का कमाल, जड़ा करियर का पहला शतक
वैभव सूर्यवंशी के छोटे भाई आशीर्वाद ने उड़ाया गर्दा, जड़ दिया अपने करियर का पहला शतक, पिता गदगद
जहां 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी राष्ट्रीय सुर्खियों में छाए हुए हैं, वहीं उनके 10 वर्षीय भाई आशीर्वाद समस्तीपुर में चुपचाप अपनी क्रिकेट यात्रा लिख रहे हैं।
बिहार के समस्तीपुर में सूर्यवंशी परिवार ने मानो क्रिकेट में सफलता का कोई ब्लूप्रिंट खोज लिया है। जिस तरह से पूरी दुनिया की निगाहें 15 वर्षीय वैभव पर टिकी हैं—जिन्होंने हाल ही में IPL 2026 सीजन में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की—उसी तरह उनके छोटे भाई, 10 वर्षीय आशीर्वाद ने भी एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एक हालिया स्थानीय प्रैक्टिस मैच में, आशीर्वाद ने नाबाद 103 रन बनाए, जो उनके करियर का पहला शतक है।
खेलने का एक अलग अंदाज
अपने बड़े भाई वैभव के विपरीत, जो अपनी आक्रामक और विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, आशीर्वाद ने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्वता दिखाई। उनकी 87 गेंदों की पारी पूरी तरह से धैर्य और सूझबूझ पर आधारित थी। उन्होंने 20 चौके और 1 छक्का जड़ा, जो उनकी लंबी पारी खेलने की क्षमता को दर्शाता है। इस उपलब्धि की जानकारी उनके भाई उज्ज्वल ने इंस्टाग्राम पर साझा की, जिसमें उन्होंने युवा बल्लेबाज के जज्बे को सराहा।
इस खबर ने उनके पिता संजीव सूर्यवंशी का ध्यान खींचा है, जो अपने बेटों के प्रशिक्षण के मुख्य सूत्रधार रहे हैं। फेसबुक पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए संजीव ने शुभचिंतकों से अपने छोटे बेटे को आशीर्वाद देने की अपील की है। हालांकि परिवार उनके लिए सबसे बड़ा स्रोत है, लेकिन वे यह भी मानते हैं कि दोनों भाइयों की तुलना करना अभी जल्दबाजी होगी।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
सूर्यवंशी भाइयों का उदय भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक बढ़ते चलन का हिस्सा है, जहां विशेष प्रशिक्षण के जरिए युवा और बेहतर तैयार खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। वैभव की तेजी से बढ़ती सफलता—घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड तोड़ डेब्यू से लेकर IPL में धमाका और भारतीय T20 टीम में जगह बनाने तक—ने एक ऊंचा मानक स्थापित किया है। हालांकि, पिता का नजरिया व्यावहारिक है: वे मानते हैं कि अभी उनका ध्यान वैभव के व्यस्त पेशेवर शेड्यूल पर है, लेकिन उन्हें यकीन है कि आशीर्वाद में अपनी अलग पहचान बनाने का अनुशासन है।
विश्लेषकों का मानना है कि 'वंडर बॉय' के भाई होने का दबाव काफी अधिक होता है। आशीर्वाद को स्थानीय स्तर पर विकसित होने देकर, परिवार उन्हें उस अत्यधिक दबाव से बचा रहा है जो अक्सर युवा प्रतिभाओं को घेर लेता है। क्या आशीर्वाद अपने भाई की तरह IPL के शिखर तक पहुंचेंगे या कोई और रास्ता चुनेंगे, यह देखना बाकी है, लेकिन परिवार की मंशा साफ है: वे लंबी रेस की तैयारी कर रहे हैं।
जैसे-जैसे वैभव और आशीर्वाद की कहानियां हिंदी भाषी क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, सवाल यह है कि क्या बिहार का क्रिकेट इकोसिस्टम इस प्रतिभा को बरकरार रख पाएगा। पत्रिका जैसे प्लेटफॉर्म्स की रिपोर्टों के जरिए आधुनिक खेलों में उम्र और विकास पर जो चर्चा हो रही है, उसे देखते हुए सूर्यवंशी भाई इस बात का एक दिलचस्प उदाहरण हैं कि आज भारतीय क्रिकेट की जड़ों में प्रतिभा को कैसे निखारा जा रहा है।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।