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रोहित की लय लौटी, ईशान की नजरें नंबर 3 पर: धर्मशाला में टीम इंडिया की तैयारी

रोहित की लय लौटी, ईशान की नजरें नंबर 3 पर: धर्मशाला में टीम इंडिया की तैयारी

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 13 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
रोहित की लय लौटी, ईशान की नजरें नंबर 3 पर: धर्मशाला में टीम इंडिया की तैयारी
रोहित की लय लौटी, ईशान की नजरें नंबर 3 पर: धर्मशाला में टीम इंडिया की तैयारी

जैसे ही 'मेन इन ब्लू' ने अपने 2027 वर्ल्ड कप चक्र की शुरुआत की है, धर्मशाला के नेट्स में भारत की मिडिल-ऑर्डर की पहेली को सुलझाने के लिए एक नई रणनीति देखने को मिल रही है।

धर्मशाला की हवा में ठंडक है, लेकिन HPCA स्टेडियम में खिलाड़ियों की मेहनत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जैसे-जैसे भारतीय टीम अफगानिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ आगामी सीरीज के लिए कमर कस रही है, माहौल में एक गंभीर बदलाव महसूस किया जा सकता है। यह सिर्फ एक और द्विपक्षीय सीरीज नहीं है; यह 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम की तैयारियों का आगाज है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ हालिया हार के बाद, बल्लेबाजी क्रम को फिर से व्यवस्थित करने की जल्दबाजी साफ देखी जा सकती है।

नेट्स के अंदर का हाल

धर्मशाला की तैयारी के दौरान टीम के बदलते समीकरणों की झलक देखने को मिली। शुरुआती झटकों के बाद रोहित की लय लौट आई है। प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद अंगूठे पर लगने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अंत में अपने सिग्नेचर पुल शॉट्स का शानदार प्रदर्शन किया। यह उनके धैर्य का क्लासिक उदाहरण था; शुरुआत में उन्हें गुरनूर बराड़ और प्रिंस यादव की तेज और स्विंग होती गेंदों के खिलाफ संघर्ष करते देखा गया, लेकिन जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, उनकी बल्लेबाजी में वही पुरानी सहजता वापस आ गई।

उनके साथ ही, सबका ध्यान प्रयोग के तौर पर नंबर 3 की जगह पर था। हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण विराट कोहली के बाहर होने से कोचिंग स्टाफ नए विकल्पों की तलाश कर रहा है। हालांकि मोर्ने मोर्केल ने यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल को संभावित उम्मीदवार बताकर चर्चा को खुला रखा है, लेकिन ईशान की नजरें नंबर 3 पर टिकी हैं और उनकी गंभीरता बताती है कि वह इस दौड़ में सबसे आगे हैं। किशन को दोहरी जिम्मेदारी निभाते देखा गया; उन्होंने नेट्स में टॉप-ऑर्डर रोटेशन में शामिल होने से पहले विकेटकीपिंग का बारीकी से अभ्यास किया।

बड़ी तस्वीर

यह सब क्यों मायने रखता है? भारत के लिए अगले वर्ल्ड कप तक का 16 महीने का समय एक प्रयोगशाला की तरह है। टीम स्पष्ट रूप से उन पुराने ढर्रों से बाहर निकलना चाहती है, जिनकी वजह से हालिया 50 ओवर के मैचों में उन्हें असफलता मिली थी। किशन को विकेटकीपर और मिडिल-ऑर्डर एंकर की दोहरी भूमिका में परखकर, मैनेजमेंट टीम की गहराई बढ़ाना चाहता है ताकि टूर्नामेंट के दौरान अनिश्चितताओं से निपटा जा सके। एक युवा तेज गेंदबाज, संभवतः गुरनूर बराड़ का जल्द ही होने वाला डेब्यू, गेंदबाजी विभाग में नए और प्रभावशाली विकल्पों की तलाश को और पुख्ता करता है।

हालांकि टीम इन तकनीकी बदलावों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन आने वाले मैच इस बात का लिटमस टेस्ट होंगे कि यह रणनीतिक प्रयोग कितने सफल होते हैं। फ्लडलाइट्स के नीचे रोहित और किशन को मेहनत करते देख यह साफ है कि तैयारी पूरी है, ताकि जब सीरीज शुरू हो, तो टीम सिर्फ जीत के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसी ठोस रणनीति के साथ उतरे जो लंबे समय तक काम आए।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।