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25% से आगे: जमीनी हकीकत को देखते हुए अग्निवीरों के रिटेंशन को बढ़ाने पर जोर

अग्निपथ योजना की समीक्षा: सशस्त्र बलों ने अग्निवीरों के रिटेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 6 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
25% से आगे: जमीनी हकीकत को देखते हुए अग्निवीरों के रिटेंशन को बढ़ाने पर जोर
25% से आगे: जमीनी हकीकत को देखते हुए अग्निवीरों के रिटेंशन को बढ़ाने पर जोर

भर्ती के पहले बैच की 2026 में होने वाली विदाई के करीब आते ही, सशस्त्र बल तकनीकी विशेषज्ञता और युवाओं की ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने के लिए अग्निपथ योजना का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

साउथ ब्लॉक के गलियारों में अग्निपथ योजना के एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण पुनर्मूल्यांकन की चर्चा जोरों पर है। भारत सरकार द्वारा रक्षा भर्ती में इस बड़े बदलाव को लागू किए हुए दो साल बीत चुके हैं, और अब सैन्य प्रतिष्ठान अपने 'अल्पकालिक सेवा' मॉडल के व्यावहारिक परिणामों से जूझ रहा है। हालांकि मूल नीति का उद्देश्य एक छोटी और युवा लड़ाकू सेना तैयार करना था, लेकिन जमीनी स्तर से, विशेष रूप से तकनीकी इकाइयों से मिल रही प्रतिक्रिया बताती है कि 25% रिटेंशन दर आधुनिक भारतीय सशस्त्र बलों के लिए आवश्यक परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए अपर्याप्त हो सकती है।

तकनीकी हकीकत की जांच

बदलाव की यह मांग तीनों सेनाओं की ओर से आ रही है, जिन्होंने सैन्य मामलों के विभाग (DMA) को अपनी सिफारिशें सौंपी हैं। विशेष रूप से भारतीय नौसेना इस बदलाव की मुखर समर्थक बनकर उभरी है। नौसेना कमांडरों का मानना है कि आधुनिक समुद्री युद्ध की जटिलता के लिए व्यापक और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। चार साल की सेवा सीमा के कारण सरकार को निवेश का सही प्रतिफल नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि नाविक जैसे ही अत्याधुनिक तकनीकी प्रणालियों को संभालने में पूरी तरह कुशल होते हैं, वे सेवा छोड़ देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, नौसेना अपने 75% तक अग्निवीरों को बनाए रखने की मांग कर रही है, जबकि भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना 50% अवशोषण दर के लिए जोर दे रही हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह आंतरिक पुनर्गठन रक्षा नीति में एक मौलिक तनाव को उजागर करता है: सेना को युवा बनाए रखने और संस्थागत अनुभव (institutional memory) को संरक्षित करने के बीच का संतुलन। जब 2022 में यह योजना शुरू की गई थी, तो लक्ष्य सैनिकों की औसत आयु कम करना था, लेकिन उच्च-स्तरीय हथियारों को संभालने की परिचालन वास्तविकता अक्सर लंबे कार्यकाल की मांग करती है। सेना अब युवा प्रोफाइल और विशेषज्ञता की निरंतरता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा, ड्यूटी के दौरान घायल होने वालों के लिए आजीवन विकलांगता लाभ प्रदान करने का प्रस्ताव उन लोगों के कल्याण संबंधी चिंताओं को दूर करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है, जो स्थायी कैडर में शामिल नहीं हो पाते हैं।

2026 की ओर नजर

इन प्रस्तावित बदलावों के लिए दांव बहुत ऊंचे हैं, क्योंकि 2023 में शामिल हुए अग्निवीरों का पहला बैच अक्टूबर 2026 में अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाला है। वर्तमान में बाहर होने वाले 75% अग्निवीरों के लिए, इस बदलाव में 'सेवा निधि' पैकेज शामिल है—जो लगभग 11.71 लाख रुपये की कर-मुक्त राशि है—लेकिन इसमें कोई पेंशन या ग्रेच्युटी नहीं है। जैसे-जैसे ये युवा रंगरूट अपने अनुबंध के आधे रास्ते पर पहुंच रहे हैं, सरकार के पास इन संरचनात्मक समायोजनों को अंतिम रूप देने के लिए बहुत कम समय बचा है। हालांकि रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इन प्रस्तावों के पीछे की गति एक ऐसी नीति को परिष्कृत करने के गंभीर प्रयास को दर्शाती है, जो दशकों में भर्ती प्रक्रिया का सबसे बड़ा बदलाव बनी हुई है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।